लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसों में सफर करना यात्रियों के लिए बहुत बड़ी सिरदर्दी बनता जा रहा है। रोडवेज की बसों से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री आते और जाते हैं। स्थिति यह है कि बसों के ठहरने से पहले ही पानी की बोतलें, चाय, जूस, ठंडा आदि बेचने वाले किशोर और युवक बसों में चढ़ जाते हैं। कई बार तो वह यात्रियों को उतरने तक नहीं देते। इस कारण यात्रियों को असुविधा होती है, खासतौर पर महिलाओं और युवतियों को सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ती है।

भुक्तभोगियों के अनुसार यह किशोर और युवक बसों में धक्का-मुक्की करने से भी पीछे नहीं रहते। इस कारण दिन में कई बार कहासुनी होना आम बात हो गई है। इसके बावजूद रोडवेज के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे इनके हौसले बुलंद हैं।
रोडवेज के मुख्य प्रबंधक से करनी चाहिए शिकायत
रोडवेज के मुख्य प्रबंधक को पत्र लिखकर बस स्टैंड पर संचालित दुकानदारों की ओर से अवैध रूप से बसों के अंदर खाद्य सामग्री बेचने वाले पर रोक लगाने की मांग की जानी चाहिए। रोडवेज को आय देने वाले यात्री; बस के इंतजार में खड़े रहते हैं और बसों में सामान बेचने वाले कुर्सियों पर बैठे रहते हैं। यही नहीं यात्रियों द्वारा उन्हें उठाने पर ये लोग मारपीट और गाली-गलोंज पर उतर जाते हैं।

यह है मुख्य नियम
– कैंटीन/स्टॉलधारी अपने व्यवसाय का सामान अपनी शॉप के अंदर ही रखेगा।

किसी भी कैंटीन, स्टॉलधारी का प्रतिनिधि, वेण्डर हॉकर सामान का विक्रय निगम वाहनों में घुसकर एवं प्लेटफार्म पर घूमकर नहीं करेगा। सामान का विक्रय स्टॉलधारी अपनी शॉप परिधि के अंदर ही कर सकेगा। उल्लंघन करने पर अनुबंध निरस्त कर दिया जाएगा।
– स्थान प्रभारी द्वारा दिए गए निर्देशों की पालन पूर्ण रूप से करना होगा।

…और बेचेंगे भी महंगा- हालात इस कदर खराब हैं कि रोडवेज बसों में यात्रियों को हर सामान दोगुना तक कीमत अदा कर खरीदना पड़ता है। पानी की बोतल हो या चिप्स आदि सामान, सभी लगभग दोगुना दाम पर बेचे जाते हैं। मेरठ से बिजनौर की इस नंबर की बस में भी यही हुआ। नामी गिरामी कंपनी हल्दीराम के चिप्स के इस पैकेट पर निर्माण तिथि, मूल्य, बैच नंबर आदि कुछ भी नहीं लिखा हुआ है। ₹ 10 वाला ये पैकेट ₹20 का है।
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