
चारा पानी के अभाव में तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे गौवंश। जिम्मेदारों को इनके इलाज से नहीं कोई सरोकार। शवों को नोच-नोच कर खा रहे गीदड़।
बिजनौर। थाना हीमपुर दीपा व विकास खण्ड हल्दौर के ग्राम माडी़ में स्थित गौशाला में गौवंशों की दुर्दशा देख हर किसी का दिल पसीजने को मजबूर हो जाएगा। कैमरे में कैद इन तस्वीरों को देख गौशाला में कार्यरत किसी कर्मी के पास कोई जबाब नहीं था, इस मामले में पूछे जाने पर टालमटोल करते रहे।
बताया गया है कि घने जंगल में स्थित इस गौशाला में करीब सौ गौवंश से ऊपर मौजूद थे परंतु अब इनकी संख्या बहुत कम हो गई है। इसकी वजह जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही मानी जा रही है। भूख प्यास से तड़प रहे चार गौवंशों ने कैमरे में कैद होते होते ही दम तोड़ दिया। विशेष बात तो यह है कि मरने वाले इन चारों गौवंशों के कानों में टैग लगा हुआ था। किसी भी गौवंश के आगे चारे का एक भी दाना नजर नहीं आया। ये भरी दोपहरी में इधर उधर घूमते हुए बंजर जमीन पर घास के तिनके खाते नजर आ रहे थे। इन गौवंशों में किसी के कान से, तो किसी के मुँह से खून आ रहा था। उनकी हालात चिंताजनक थी, परंतु किसी भी जिम्मेदार को इनके इलाज से कोई सरोकार नहीं था। गौशाला से महज चंद कदम की दूरी पर जेसीबी से खुदा कई मीटर लम्बा व कई फिट चौड़ा गड्ढा नजर आया, जो कई गौवंश के शवों से भरा हुआ था। उनके शवों को गीदड़ नोच-नोच कर खा रहे थे।
कैसे भरेगा 30 ₹ में पेट? जब इस संबंध में वहां मौजूद दो कर्मियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि तीस रुपए प्रति पशु के चारे में इनका पेट कैसे भरेगा? उसमें भी उन्हें तीस रुपए पूरे नहीं मिलते। कैमरे में कैद हुए तड़प तड़प के दम तोड़ने वाले इन पशुओं की आकाल मौत ने एक बात तो साफ कर दी है कि मुख्यमंत्री को गौवंशों की भेजी जाने वाली रिपोर्ट व तस्वीरें इससे कहीं जुदा होंगी!
नया नहीं है मामला- चांदपुर तहसील क्षेत्र में स्थित इस गौशाला की दयनीय हालत के प्रति प्रशासन भी आखें बंद किये हुए है। जिला बिजनौर में पशुओं की इस दयनीय स्थिति का पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पूर्व में भी कई गौशालाओं में गौवंशों की ऐसी दुर्दशा जगजाहिर चुकी है। उधर लॉकडाउन के समय पर भी इस गौशाला को जाने वाले रास्ते पर करीब आधा दर्जन से अधिक गौवंशों के शव पड़े मिले थे, जिनको बीच रास्ते पर फेंकने वाले का आज तक पता नही चल सका।
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