नजीबाबाद (बिजनौर)। स्वास्थ्य विभाग में दो साल पहले गैर जनपद हुए ट्रांसफर के बाद अधिकारियों की ओर से बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी आवास खाली नहीं हो रहे है। बताया जाता है कि सरकारी अस्पतालों के आवास पर उन चिकित्सकों ने अभी तक अपना अवैध कब्जा कर रखा है, जिनका कई साल पहले यहां से गैर जनपद या दूसरे स्थान पर ट्रांसफर हो चुका है। यहां तक कि खुद प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के आवास पर कई साल पहले ट्रांसफर हुए डॉक्टर का कब्जा चल रहा है, जबकि इस दौरान कई प्रभारियों की नियुक्ति हो चुकी है। सरकारी अस्पतालों के आवास पर एक दूसरे को देख कर धड़ल्ले से अवैध कब्जे का खेल चल रहा है। बार-बार नोटिस जारी होने के बाद भी कब्जाधारियों पर कोई असर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। इसके चलते नजीबाबाद तबादला होकर आए अन्य चिकित्सा अधिकारियों को आवास के लिए परेशान होना पड़ रहा है। विगत दिनों पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आए सीएमओ विजय गोयल से सरकारी आवासो पर अवैध कब्जे की शिकायत की गई थी, जिस पर सीएमओ ने नोटिस देकर शीघ्र सरकारी आवासो खाली करने को कहा था लेकिन कई नोटिसों के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं हो पा रहे हैं। तीन दिन पूर्व सम्पूर्ण समाधान दिवस पहुंचे डीएम उमेश मिश्रा के सामने मीडियाकर्मियों ने यह मुद्दा उठाया था। डीएम ने सीएमओ को सख्त आदेश करते हुए कहा था कि कब्जा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए और पुलिस का सहारा लेकर आवासों को कब्जा मुक्त कराया जाये। डीएम उमेश मिश्रा के आदेश के बाद भी सरकारी आवास कब्जा मुक्त ना होने से स्वास्थ्य विभाग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

सीएमओ की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
नजीबाबाद। बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी सरकारी आवास को कब्जा मुक्त ना करने पर अभी तक कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, जबकि सीएमओ की ओर से मुकदमा दर्ज करने की बात कही गई थी। सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इसके पीछे खुद सीएमओ का तो मौन समर्थन हासिल नहीं है, जिसकी बदौलत सरकारी आवास कब्जा मुक्त नहीं हो पा रहे हैं।
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