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बिजनौर। नगर पालिका परिषद, बिजनौर में कार्यरत तथा सेवानिवृत कर्मचारियों को भी जलकर, गृहकर तथा जलमूल्य अदा करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के समान कोई वित्तीय तथा अन्य कोई सुविधा प्राप्त न होने की बात रखते हुए वर्ष 2014 में उक्त करों से मुक्ति दिलाने की मांग उठाई थी। हालांकि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने मांगों को स्वीकार करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद अध्यक्ष बदले और अधिशासी अधिकारी भी बदले, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में ही पड़ा हुआ है।

27 दिसंबर 2014 को नगर पालिका परिषद बोर्ड की बैठक में कर्मचारियों के प्रार्थना-पत्र पर बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति व निर्णय हुआ। सभी नियमित, स्थायी तथा सेवानिवृत अधिकारियों / कर्मचारियों को दिनांक 01-04-2014 से उनके जीवन काल तक भूमि भवन कर, जल कर तथा जल मूल्य से मुक्त किया गया। इसके बावजूद  आठ साल बीतने के बाद भी आज तक मामला अधर में लटका हुआ है।

नगर पालिका परिषद बिजनौर बोर्ड की बैठक में कार्यरत तथा सेवानिवृत कर्मचारियों को भी जलकर, गृहकर से मुक्त करने तथा जलमूल्य निःशुल्क प्रदान करने का मुद्दा उठाया गया था। कर-अधीक्षक, कर-निर्धारण अधिकारी तथा अधिशासी अधिकारी को संबोधित करते हुए बताया गया कि वह अल्प वेतन भोगी कर्मचारी हैं तथा उन्हें सरकारी कर्मचारियों के समान कोई वित्तीय तथा अन्य कोई सुविधा प्राप्त नहीं है। वह लोग जलकर, गृहकर तथा जलमूल्य का भुगतान करने में असमर्थ रहते हैं। विशेषकर सेवानिवृत कर्मचारियों की पेंशन राज्य कर्मचारियों से कम होने के कारण, सेवानिवृत कर्मचारी उक्त करों के भुगतान करने योग्य नहीं रहते। नगर निगम कानपुर, आगरा, लखनऊ तथा अन्य नगर पालिका परिषदों में उपरोक्त करों से नगर पालिका में कार्यरत व सेवानिवृत कर्मचारियों को मुक्त किया हुआ है। इसलिए नगर पालिका परिषद, बिजनौर में कार्यरत तथा सेवानिवृत कर्मचारियों को भी जलकर, गृहकर से मुक्त किया करने तथा जलमूल्य निःशुल्क प्रदान करने की मांग की गई।

अवलोकन उपरांत स्वीकृति बोर्ड की ओर से निर्णय हुआ कि  सम्बन्धित पत्रावली पर उपलब्ध कर्मचारियों के प्रार्थना पत्र व कार्यालय की आख्या दिनांक 28-02-2013 और 18-05-2013 का अवलोकन किया गया। प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकार्य करते हुए नगर पालिका परिषद बिजनौर के सभी नियमित, स्थायी तथा सेवानिवृत  अधिकारियों / कर्मचारियों को दिनांक 01-04-2014 से उनके जीवन काल तक भूमि भवन कर, जल कर तथा जल मूल्य से मुक्त किया गया। साथ ही निर्णय हुआ कि यह लाभ सम्बन्धित अधिकारी / कर्मचारी को केवल एक उसी भवन/सम्पत्ति तथा वाटर कनैक्शन पर प्राप्त होगा, जिसमें वह स्वयं निवास करता हो, चाहे वह सम्पत्ति / भवन तथा वाटर कनैक्शन उसके स्वयं के नाम हो अथवा पति, पत्नी, माता/पिता व पुत्र, के नाम हो। प्रतिबन्ध यह होगा कि सम्बन्धित भवन/सम्पत्ति का वह आंशिक रूप से अथवा पूर्णरूप से नियमानुसार स्वामी/वारिस भी हो। इसमें नियमानुसार आगामी आवश्यक कार्यवाही के निर्देश भी हुए।

पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी विकास कुमार ने भी उत्तर प्रदेश गजट, 30 अप्रैल 2022 को आदेश जारी किए कि उक्त प्रकरण में 21 अगस्त 2015 को स्थानीय समाचार पत्र में सूचना प्रकाशित करा कर 30 दिन के भीतर आपत्तियां मांगी गई थीं। निर्धारित समय में कोई आपत्ति नहीं प्राप्त हुई। अतः नगर पालिका अधिनियम, 1966 की धारा 293 एवम उसमें दो गई उप धाराओं तथा शासन द्वारा समय समय पर दिए गए दिशा निर्देशों के क्रम में उक्त निर्णय लिया।

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