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मनरेगा की आईडी पर नहीं मिली थी वित्तीय स्वीकृति, फिर भी डाली थी इंटरलॉकिंग

डीएम से शिकायत के बाद रोका गया था भुगतान

तीन महीने बाद उसी काम को ग्राम निधि में दिखाकर कर लिया फर्जी भुगतान

उरई (जालौन) | विकास कार्यों में इतना भ्रष्टाचार इसके पहले कभी नहीं देखा गया, जितना अधिकारियों के गैरजिम्मेदाराना रवैये से अब हो रहा है। ग्राम पंचायत में तो सरकारी पैसा लूटने की होड़ लगी हुई है, जिसके कारण कागजों में काम दिखाकर फ़र्ज़ी तरीके से पैसा निकाला जा रहा है। माधौगढ़ ब्लॉक के ग्राम असहना में सचिव और प्रधान ने इंटरलॉकिंग निर्माण के नाम पर दो लाख का फ़र्ज़ी भुगतान कर लिया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई लेकिन उसे भी फर्जी ही निस्तारण कर दिया।

ग्राम असहना में बिना इस्टीमेट और वित्तीय स्वीकृति के मार्च 2022 में तीन मनरेगा आईडी क्रमांक 8952, 8954 और 8955 पर इंटरलॉकिंग का निर्माण करा दिया गया। इसकी लिखित शिकायत जिलाधिकारी को श्रमदान घोषित करने के लिए की गई, साथ ही ग्राम सचिव से आरटीआई डालकर इस्टीमेट और वित्तीय स्वीकृति की छायाप्रति भी मांगी गई लेकिन भृष्टाचार की पराकाष्ठा को पार किये सचिव शैलेश सोनकर ने जवाब नहीं दिया और खंड विकास अधिकारी दीपक कुमार ने करवाये गए कार्य का भुगतान रोक दिया बल्कि ब्लॉक में इसी प्रकार कराये गए ज्यादातर कामों के भुगतान पर रोक लगा दी। शिकायतों के बाद सचिव शैलेश सोनकर और प्रधान सोना देवी ने आपस में सांठगांठ कर 13 जून 2022 को इसी इंटरलॉकिंग को फ़र्ज़ी तरीके से ग्राम निधि में सीसी रोड से रामकुमारी के मकान तक दर्शाकर 2 लाख 4 हज़ार 578 का भुगतान कर लिया। यह जानकारी होने के बाद पूरे मामले की जानकारी खंड विकास अधिकारी को दी गई और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई। उसके बाद भी भृष्ट सचिव की ठीठता देखिए कि शिकायत पर वर्तमान सचिव अभिनव पाठक से फ़र्ज़ी निस्तारण करा दिया। राष्ट्रीय स्तर पर छाए ऐसे ही फर्जी मामले पर कुछ दिन पूर्व दमरास गांव में कई जिम्मेदारों पर जिलाधिकारी के आदेश के बाद एफआईआर तक दर्ज हुई, लेकिन माधौगढ़ ब्लॉक के कई गांवों में मनरेगा से लेकर अन्य विकास कार्यों में जमकर लूट मची हुई है और जिम्मेदार अधिकारी कमीशनखोरी के आंकड़े में सब मैनेज कर मामले को दबाने की जुगत में लग जाते हैं।

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