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उत्पीड़न के खिलाफ ग्राम पंचायत व विकास अधिकारियों ने उठाई आवाज

डीपीआरओ को डिजीटल सिग्नेचर सौंपने का निर्णय

बिजनौर। उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति ने विकास भवन में धरना प्रदर्शन किया। मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर अपना डिजीटल सिग्नेचर जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंपने के निर्णय से अवगत कराया।

समन्वय समिति के अध्यक्ष धीरज सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ऐकेश्वर, मंत्री हेमेन्द्र सिंह, अरविन्द सिंह, कुलदीप राजपूत, के नेतृत्व में जिले भर से आए सचिवों ने कहा कि ग्राम पंचायतों में जन प्रतिनिधियों द्वारा सीधे कार्यों की एमबी कराकर सचिवों पर भुगतान का दबाव बनाया जाता है। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला लाने पर भी कोई सहयोग नहीं किया जाता। अनियमितता होने पर सम्पूर्ण उत्तरदायी सचिव का ठहरा दिया जाता है। यह अव्यवहारिक एवं अन्यायपूर्ण है। वक्ताओं ने कहा कि पंचायत सचिव अपनी पंचायतों में रोस्टर के अनुसार बैठते हैं। मनरेगा के कार्य की उपस्थिति दिन में दो बार मेट एवं रोजगार सेवक द्वारा लगाई जाती है।

सचिवों द्वारा मनरेगा कार्यों का मौके पर जाकर शत प्रतिशत सत्यापन संभव नहीं है। तकनीकि सहायक द्वारा कार्य का मूल्याकंन करने के उपरांत भुगतान किया जाता है। अनियमितता होने पर सम्पूर्ण उत्तरदायित्व सचिव पर निर्धारित कर दिया जाता है। तकनीकि मूल्याकंन के बाद पूर्ण भुगतान के लिए जेई व तकनीकि सहायक / मेट/ रोजगार सेवक का उत्तरदायित्व होना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि ग्राम पंचायत भवन / सामुदायिक शौचालय / ऑपरेशन कायाकल्प शासन की मूल प्राथमिकता है परन्तु धनराशि के अभाव में उक्त कार्यों के विलम्बित होने पर भी सचिव को ही दोषी मान लिया जाता है, ये भी अन्याय है। सभी सचिवों ने निर्णय किया कि वे सभी अपना डिजीटल सिग्नेचर जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंप रहे हैं। बाद में सभी ग्राम सचिवों ने अपनी इन मांगों को लेकर एक ज्ञापन मुख्य विकास अधिकारी को सौंप दिया। इस दौरान भारी संख्या में जिले भर के सचिव मौजूद रहे।

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