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सुल्तानपुर में दुष्कर्म के आरोपी इंस्पेक्टर पर 25 हजार का इनाम घोषित

फरार आरोपी इंस्पेक्टर के पोस्टर जिले में कई जगह किए गए चस्पा

सुल्तानपुर। महिला सिपाही से दुराचार के मामले में आरोपी इंस्पेक्टर तोमर के खिलाफ रुपए 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है। जिले में कई जगह उसके पोस्टर भी चस्पा कर दिए गए हैं। एसपी का कहना है कि सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

बताया गया है कि इंस्पेक्टर निशू तोमर सुल्तानपुर के हलियापुर थाने में तैनात था। आरोप है कि ड्यूटी के दौरान उसने एक महिला सिपाही के साथ लंबे समय तक दुराचार किया। नगर कोतवाली में दुराचार, मारपीट समेत कई धाराओं में इंस्पेक्टर तोमर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद 22 सितंबर को सत्र न्यायालय से महिला थाने की पुलिस इंस्पेक्टर को थाने ले गई। यहां पर महिला थानाध्यक्ष मीरा कुशवाहा को चकमा देकर इंस्पेक्टर तोमर फरार हो गया। इंस्पेक्टर की पत्नी की तरफ से हाईकोर्ट में हैबियस कार्पस याचिका दाखिल कर उनके पति को लाए जाने की गुहार लगाई गई। मामले में तत्काल प्रभाव से प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए एसपी सोमेन वर्मा ने थानाध्यक्ष महिला मीरा कुशवाहा को सस्पेंड कर दिया था। पूरे मामले की जांच सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी को सौंप दी गई थी।

यही नहीं हाईकोर्ट ने डीजीपी को तलब करते हुए व्यक्तिगत एफिडेविट देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट की तरफ से बीती 7 दिसंबर को मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस विभाग को अग्रिम कार्रवाई कर अवगत कराने का निर्देश दिया गया। इसी कड़ी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती रचना की कोर्ट से इंस्पेक्टर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। एसपी ने फरार इंस्पेक्टर पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया है। पुलिस की ओर से इस संबंध में पोस्टर चस्पा किए गए हैं।

एसपी सोमेन वर्मा का कहना है कि लापता इंस्पेक्टर के खिलाफ 25000 रुपए का इनाम घोषित किया गया है। विभाग की तरफ से सार्वजनिक स्थल पर पोस्टर लगवाए जा रहे हैं। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। सूचना देने वाले को पर्याप्त सुरक्षा भी मुहैया कराई जाएगी।

क्या है हैबियस कॉर्पस पीटिशन?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 देश के नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। यह अनुच्छेद नागरिक को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस पीटिशन का अधिकार देता है। हैबियस कॉर्पस का शब्दिक अर्थ होता ‘सशरीर’। इसे हिंदी में बंदी प्रत्यक्षीकरण कहा जाता है। इसका उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति की रिहाई के लिए किया जाता है, जिसको बिना कानूनी औचित्य के अवैध रूप से हिरासत में लिया गया हो, या फिर पुलिस हिरासत में लिया गया है पर उसे हिरासत में लिए जाने के 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश नहीं किया है। भारतीय संविधान में इसे इंग्लैंड से लिया गया है।

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