36 गोवंश क्रूरता पूर्वक छोड़ने पर 5 के खिलाफ एफआईआर
परियोजना निदेशक, डीआरडीए ज्ञानेश्वर तिवारी ने दी जानकारी
डीएम के निर्देश पर सीडीओ चला रहे अभियान

बिजनौर। ग्राम धनौरा में ग्राम पंचायत का ताला तोड़कर लगभग 36 गोवंश क्रूरतापूर्वक अंदर छोड़े जाने के मामले में इयर टैग प्रक्रिया के आधार पर 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
परियोजना निदेशक, डीआरडीए ज्ञानेश्वर तिवारी ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम धनौरा में कतिपय लोगों द्वारा ग्राम पंचायत का ताला तोड़कर लगभग 36 गोवंश क्रूरतापूर्वक पंचायत भवन के अंदर छोड़े गए। इनमें इयर टैग प्रक्रिया के आधार पर 5 दोषियों का चिन्हिकरण कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है।
उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान धनौरा विनीत कुमार द्वारा ग्राम पंचायत धनौरा के पंचायत भवन के प्रांगण में कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से ताला तोड़कर लगभग 36 गोवंश पंचायत भवन के अंदर छोड़े के विरुद्ध थाना कोतवाली देहात में पशु क्रूरता अधिनियम के लिए के तहत केस दर्ज कराया गया। उन्होंने बताया कि पंचायत भवन के अंदर छोड़े गए गोवंश की इयर टैग करने पर उस पर दर्ज नंबर का पशुपालन विभाग से ऑनलाइन मिलान किया गया। टैग संख्या के आधार पर मालूम हुआ कि राधेश्याम निवासी ग्राम धनौरा, अनुज कुमार निवासी रसूलपुर जागन, मूल सिंह निवासी फरीदपुर संसारू तथा पप्पू पुत्र श्याम सिंह निवासी फरीदपुर डल्लू द्वारा अपने गोवंश पंचायत भवन में छोड़े गए। शेष गोवंश के मालिक अज्ञात हैं। उन्होंने बताया कि उक्त व्यक्तियों द्वारा पंचायत भवन में अपने गोवंश छोड़कर कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने तथा उनके द्वारा पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय अपराध किया गया है।
गौरतलब है कि प्रशासन ने गोवंश को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। खोजी टीम लगातार खुलेआम घूमते गोवंश को चिन्हित कर रही है। सीडीओ पूर्ण बोरा ने पशु मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कैटल शेडों की जमीनी हकीकत जानने के लिए भी ब्लॉकवार टीम बनाई है।
डीएम उमेश मिश्रा ने निराश्रित गोवंश को लेकर अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की सख्त हिदायत दी गई। डीएम ने गोवंश संरक्षण के लिए अभियान चलाने के लिए कहा। अभियान की कमान सीडीओ पूर्ण बोरा को सौंपी गई है। सीडीओ ने अधिकारियों से अभियान में ढील नहीं बरतने पर जोर दिया है।
अभी ये है व्यवस्था ~
सीडीओ पूर्ण बोरा ने बताया कि जिले के 35 गो आश्रय स्थलों में करीब 3500 पशु रह रहे हैं। गोवंश को हरा चारा, भूसा, पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। गोवंश को ठंड से बचाने की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश हैं। पशु चिकित्सकों पर गोवंश की स्वास्थ्य जांच करने की जिम्मेदारी है। सभी एसडीएम को केटल शेड व गोवंश को प्रदत्त सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के निर्देश दिए गए हैं।
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