विधान परिषद की पांच सीटों में से चार पर जीती भाजपा

बरेली-मुरादाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के द्विवार्षिक विधान परिषद चुनाव 2023 में भाजपा उम्मीदवार डॉ. जय पाल सिंह व्यस्त ने सपा उम्मीदवार शिव प्रताप सिंह को 51,257 वोटों से मात दी। गोरखपुर- फैजाबाद स्नातक खंड चुनाव में भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा प्रत्याशी करुणाकांत मौर्य को हराया। कानपुर स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा के अरुण पाठक ने 53 हजार से अधिक वोटों से सपा के कमलेश यादव को हराया। झांसी-इलाहाबाद शिक्षक सीट पर चौथी बार चुनावी मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी सुरेश त्रिपाठी को भाजपा के बाबू लाल तिवारी ने पराजित किया। सपा के एसपी सिंह पटेल तीसरे स्थान पर खिसक गए।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पांच विधान परिषद सीटों में से चार पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी एक बार फिर कोई साइट नहीं जीत सकी।
वर्ष 2017 में हुए इन पांच एमएलसी सीट के चुनाव में भाजपा को 4 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि पार्टी अपने प्रदर्शन को दोहराने में कामयाब रही लेकिन कानपुर की एक सीट गंवा दिया। कानपुर शिक्षक सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यहां से शिक्षक नेता राज बहादुर पटेल ने जीत हासिल की है। वे छठी बार चुनकर विधान परिषद पहुंचे हैं। पहले भाजपा में थे, इस बार उनका टिकट काटा गया था। भाजपा के हाथ से कानपुर शिक्षक सीट फिसल गई। कानपुर शिक्षक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी राज बहादुर चंदेल ने भाजपा के वेणु रंजन को हराया। राज बहादुर चंदेल पहले भाजपा में थे। इस बार उनका टिकट काट कर वेणु रंजन भदौरिया को चुनावी मैदान में उतारा गया। समाजवादी पार्टी के हेमराज सिंह गौर तीसरे स्थान पर रहे। कानपुर सीट भाजपा के हाथ से निकल गई, लेकिन झांसी-इलाहाबाद सीट पर भाजपा को बड़ी जीत मिली। झांसी-इलाहाबाद शिक्षक सीट पर पिछले चुनाव में सुरेश त्रिपाठी ने जीत दर्ज की थी। निर्दलीय प्रत्याशी के प्रत्याशी के तौर पर वे जीत की हैट्रिक लगा चुके थे। चौथी बार चुनावी मैदान में उतरे थे। लेकिन, इस बार भाजपा के बाबू लाल तिवारी ने उनकी चौथी जीत पर ब्रेक लगा दिया। इस सीट पर सपा के एसपी सिंह पटेल तीसरे स्थान पर खिसक गए।
सपा को मिला करारा झटका~ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद पार्टी को एमएलसी चुनाव के रिजल्ट ने करारा झटका दिया है। मैनपुरी लोकसभा उप चुनाव में बड़ी जीत के बाद सपा ने अपनी रणनीति बदलते हुए जातीय राजनीति को साधने का प्रयास किया। रामचरितमानस पर बयान के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में प्रमोशन मिला, लेकिन शिक्षक और स्नातक सीटों के वोटरों को यह रास नहीं आया और पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी के विधान परिषद में 9 एमएलसी हैं। विधान परिषद में नेता विपक्ष का पद हासिल करने के लिए 10 सीट जरूरी हैं। इन पांच सीटों में से सपा कम से कम एक सीट पर जीत की उम्मीद कर रही थी, लेकिन उन्हें यह हासिल नहीं हो सकी।

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