नहटौर में हुआ बज्मे उर्दू अदब के तत्वावधान में शेरी नशिस्त का आयोजन
मा. अज़ीज़ नहटौरी, काजी मोनिश व हाफिज इताअत को शाल ओढ़ाकर सम्मान
बिजनौर। बज्मे उर्दू अदब के तत्वावधान में एक शेरी नशिस्त का आयोजन नहटौर के मोहल्ला तिरग्रांन में हाफिज इताअत के आवास पर हुआ। शुभारम्भ एचएमआई इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य सय्यद बिलाल ज़ैदी एव काजी मोनिश ने संयुक्त रूप से शमा रौशन कर किया।

नशिस्त का आगाज शम्स नहटौरी की नाते पाक से हुआ। उन्होंने हुजूर की शान बयान करते हुए कहा कि-
छेड़ दो जिक्रे सैय्यदे आलम नेमतों का नजूल हो जाए।
उनका दीदार हो नसीब हमें यह दुआ भी कबूल हो जाए।
गजल के दौर का आगाज करते हुए आलम देहलवी ने फ़रमाया-
कमजोर खुद भी हो गया और हो रहा है खुश।
एक भाई अपने भाई के बाजू को काटकर।
नौजवान शायर अकबर नहटौरी ने खूब दाद बटोरी-
दुश्मनों का यूं ही नाम बदनाम है।
जख्म जब भी मिले, दोस्तों से मिले।
मुल्क में नहटौर की नुमाइंदगी करने वाले शायर शाद फरीदी को खूब दादो तहसीन से नवाजा गया-
बे हुनर हूं मुझे मैंराजे हुनर हो जाए। एक ग़ज़ल मीर के लहजे में अगर हो जाए।
मखमली आवाज के जादूगर शम्स नहटौरी ने महफ़िल को रौनक बख्शी-
सारे दुख दर्द भूल जाओगे। सिर्फ एक बार मुस्कुराने से।
उस्ताद शायर मा अज़ीज़ नहटौरी ने एक के बाद एक गजलें सुनकर समा बाँध दिया-
घर के बंटवारे की ख्वाहिश है तो यह भी सोच ले।
तेरा आंगन तंग हो जाएगा दीवारों के बीच।
इसके अलावा मगलौर से तशरीफ़ लाए काजी मोनिश ने अपनी गजलियात से महफ़िल रौशन कर दी।

नशिस्त में पूर्व चेयरमेन हाजी मकसूद अहमद ने मा. अज़ीज़ नहटौरी, काजी मोनिश व हाफिज इताअत को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। हाजी मकसूद की सदारत एवं शम्स नहटोरी की निजामत में देर रात तक चली नशिस्त में डा काजी विकार, मोहब्बत अंसारी, काजी रियाज, पत्रकार सलीम सिद्दीकी, ज़ाहिद कुरैशी, नोशाद आलम, नदीम अहमद आदि गणमान्य लोग मौजूद थे। आखिर में हाफिज इताअत ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
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