वरिष्ठ बसपा नेता सरवर मलिक की पत्नी शाहीन बानो को बनाया प्रत्याशी
समाजवादी पार्टी ने वंदना मिश्रा को बनाया है प्रत्याशी
लखनऊ मेयर सीट पर मुस्लिम कार्ड खेल बसपा ने बढ़ाई सपा की मुश्किल
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने शाहीन बानो को लखनऊ से मेयर प्रत्याशी बना कर सपा को मुश्किल में डाल दिया है। बसपा ने लखनऊ की 5 नगर पंचायत और 30 वार्ड के लिए भी प्रत्याशियों के नामों का एलान किया है। अगले महीने दो चरणों मे सम्पन्न होने वाले निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी, सपा, बसपा समेत सभी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के चयन पर मंथन कर रही हैं। कांग्रेस ने दो और सपा ने लखनऊ समेत 9 मेयर की सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी ने भी लखनऊ से मेयर पद के लिए अपने पत्ते खोल दिए। पिछली बार इस सीट से बीजेपी की संयुक्ता भटिया ने जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार अभी तक बीजेपी ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। वहीं समाजवादी पार्टी ने वंदना मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है।

जनता साथ देगी, इसी भरोसे पर आगे बढ़े हैं: शाहीन
टिकट फाइनल होने के बाद बसपा की लखनऊ से मेयर प्रत्याशी शाहीन बानो ने कहा कि वो सड़कों, नाली और सीवर की सफाई, महिला सुरक्षा समेत तमाम अन्य मुद्दों पर काम करेंगी। लड़ाई और रास्ते हमेशा कठिन होते हैं लेकिन ऊपर वाला सब आसान कर देता है। पीछे जो छूट गया उसे आगे पूरा करेंगे। अपनी बात जनता के बीच में मजबूती से रखेंगे, हमें भरोसा है जनता साथ देगी। इसी भरोसे पर आगे बढ़े हैं। शाहीन ने कहा कि वोट लेने की बात हो तो सपा को मुस्लिम याद आता है, लेकिन टिकट देने में भूल जाते हैं। उन्होंने मुस्लिम कार्ड जैसी किसी बात से इंकार किया। शाहीन ने दावा किया कि मुस्लिम वोटर भी एकजुट होकर हमारे साथ आएगा। बहन जी का दिया काम बखूबी पूरा करेंगे।
शाहीन बानो वर्ष 2022 में बसपा के टिकट पर लखनऊ की उत्तर विधानसभा से चुनाव हारे सरवर मलिक की पत्नी हैं। टीएमसी के टिकट पर भी उन्हें 2014 में लखनऊ से लोकसभा चुनाव में हार मिली थी। बसपा नेता सरवर मलिक ने कहा कि जब वोट लेने की बारी आती है तो सपा का “एमवाई” फैक्टर चलता है। साथ ही सवालिया निशान उठाया कि जब टिकट देने की बारी आती है तो “एम” कहां चला जाता है, यह एक बड़ा सवाल है।

हमने हिम्मत की है एक मुस्लिम को टिकट देने की
बसपा एमएलसी व मंडल कोऑर्डिनेटर भीमराव अंबेडकर ने कहा कि भाजपा, सपा व अन्य दलों ने समाज को बांटने के एंगल से काम किया, लेकिन बसपा इन से हटकर काम करती है। पिछले चुनाव में 13 फ़ीसदी वह लोग हैं जो इस सांप्रदायिकता की आंधी में नहीं बहे और बसपा के साथ रहे। बसपा की नीति भाईचारे और सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की है। हमने हिम्मत की है एक मुस्लिम को टिकट देने की। इस देश प्रदेश को अगर कोई बचा सकता है तो सिर्फ मायावती ही हैं। हम तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, पिछड़े हर समाज से कैंडिडेट देते हैं।
दोहरा है भाजपा, सपा का चाल चरित्र
बसपा नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा, सपा का चाल चरित्र दोहरा है। मुसलमानों की बात करते है लेकिन उन्हें हिस्सा नहीं देना चाहते। जब उन पर जुल्म होता तो आवाज नहीं उठाते। इन लोगों को डर है कि हम मुस्लिम को कैंडिडेट बना देंगे तो इनका क्या होगा। भाजपा भी आज मुसलमानों की बात कर रही, एक तरफ उनका खात्मा कर रहे और दूसरी तरफ उनकी बात कर रहे हैं। उनको डर है कि कहीं मुस्लिम समाज को पता चल गया कि उनका हित कहां सुरक्षित है तो वह बसपा के साथ खड़ा होगा, क्योंकि जब वह सपा के साथ खड़े होते हैं तो भाजपा को नहीं हटा पाते।
भाजपा चाहती मुस्लिम समाज रहे सपा के साथ
बसपा नेता ने कहा, भाजपा चाहती है कि मुस्लिम समाज के लोग सपा के साथ बने रहे तो हमारा राज चलता रहेगा, लेकिन अगर मुस्लिम समाज के लोग समझ कर बसपा साथ चले गए तो उनके लिए मुश्किल होगी और भाजपा का उत्तर प्रदेश में नाम लेने वाला कोई नहीं होगा। सरवर मलिक हमारी तरफ से विधानसभा का चुनाव लड़े। वह पार्टी के समर्थित और वफादार सिपाही हैं, हर परिस्थिति में वह बसपा साथ हैं। मायावती ने कार्यकर्ता पर विश्वास किया है, उनकी पत्नी को टिकट दिया है।
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