कायस्थों के कोड 21 से अलग बंगाली कायस्थों को दिया कोड संख्या 205
राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद ने जताया विरोध, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन

जातीय गणना में कायस्थों के लिए दो कोड स्वीकार्य नहीं
अररिया। बिहार में जातीय गणना की शुरुआत हो चुकी है, इसके लिए सभी जातियों के लिए एक कोड आवंटित किया गया है, परन्तु कायस्थ समाज के लिए दो-दो कोड आवंटित किए गए हैं। राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद ने इस पर आपत्ति जताई है। महापरिषद के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरिहर सिन्हा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुमन कुमार मल्लिक और युवा संभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद सिंहा ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के कार्यालय में ज्ञापन देकर इसमें सुधार का अनुरोध किया है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल इन नेताओं का कहना है कि कायस्थ समाज को जातीय गणना में दो-दो कोड का आवंटन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। इससे आपस में ही भ्रम की स्थिति बन जायेगी। इन नेताओं ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में बताया कि जाति जनगणना में कायस्थ समाज का मूल कोड संख्या 21 आवंटित किया गया है, परन्तु सूची के अवलोकन से पता चलता है कि बंगाली कायस्थ के लिए एक संवर्ग तथा एक भिन्न कोड 205 आवंटित किया गया है।
नेताओं के अनुसार इसका कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है और श्री चित्रगुप्त के सभी वंशज कायस्थ है। इनमें कोई विभेद नहीं है चाहे वे किसी भी देश या प्रदेश में निवास करते हों। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी सूची में श्रीवास्तव, दर्जी और लाला को अलग से सूचीबद्ध कर दिया गया था, जिसे बाद में संशोधित किया गया।
महापरिषद ने अपने ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि जातीय गणना में कोड संख्या 205 को निरस्त एवं विलोपित करके, कायस्थों के लिए सिर्फ एक ही कोड संख्या 21 को ही स्थायी रूप से कोड के रूप में संशोधित किये जाने की पहल करें।

जातियों के कोड में 205 नंबर ‘बंगाली कायस्थ’
15 अप्रैल को बख्तियारपुर स्थित अपने पैतृक आवास पर बिहार में जातीय जन-जगणना की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुलकर कहा कि यह जातियों की गणना है, उपजातियों की नहीं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भागलपुर-पूर्णिया और पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में कायस्थ जाति के लोग प्रगणकों को पकड़ कर पूछ रहे हैं कि जातियों के कोड में 205 नंबर ‘बंगाली कायस्थ’ लिखा है। यह क्या है? कायस्थ की उपजाति श्रीवास्तव और टाइटल लाल व लाला को हिंदू दर्जी में लिखे होने पर ‘कायस्थ समाज’ ने आवाज उठाई तो उसे हटाया गया, लेकिन अब कायस्थों में 205 नंबर कोड से गुस्सा है।

क्यों हो रहा विरोध, कौन हैं बंगाली कायस्थ
दरअसल, मुख्यमंत्री भी इसे जाति गणना कह रहे हैं लेकिन इसके लिए जातियों का कोड निर्धारित किए जाते समय जानकारी के अभाव या किसी सोच के तहत कई उप जातियों को जाति के रूप में दिखा दिया गया है। बंगाली बोलने वाले और बंगाल से बिहार में आकर सदियों पहले बसे कायस्थों को बिहार में कायस्थ समाज के बीच आम कायस्थों की तरह दर्जा दिया जाता है। परंपराओं और संस्कृति में अंतर के कारण शादी-ब्याह में गतिरोध की जानकारी भी एक समय आती थी, लेकिन अब नहीं।

जाति कायस्थ, कोड 21 ही रखेंगे, मगर…
ऐसे में बंगाली कायस्थ खुद को कायस्थ से अलग मानने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन जातियों के लिए जारी कोड में इन्हें कायस्थों के कोड 21 से अलग कोड संख्या 205 दिया गया है। बंगाली कायस्थों का कहना है कि भगवान चित्रगुप्त की संतान सभी एक हैं, इसलिए वह कोड 21 के अलावा किसी तरफ ध्यान नहीं देंगे। लेकिन, कायस्थ समाज यह भी अपील कर रहा है कि इस संशय के लिए जिम्मेदार लोगों पर मुख्यमंत्री कार्रवाई करें।
By~ Sanket Shrivastava, kayasthasetu
Leave a comment