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चुनावी चकल्लस

चेयरपर्सन पति, पापा और मम्मी के बाद अब चेयरपर्सन खालू के पास जाएगा कौन!

~हर्यश्व सिंह सज्जन

बिजनौर में आम जनता के बीच आजकल एक चर्चा जोर पर है। सीट दूसरी बार महिला के लिए आरक्षित हुई है। ऐसे में नेताओं ने अपनी पत्नियों को आगे कर दिया है। रिकॉर्ड बताता है कि पंचायत और नगर निकायों में ऐसी स्थिति पर एक अंसवैधानिक पद अपने आप सृजित हो जाता है, जिसे ग्राम प्रधान पति या चेयरपर्सन पति कहा जाता है। आपको इसके बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो पंचायत के नाम से आई वेबसीरीज देखिए। रघुवीर यादव और नीना गुप्ता के अभिनय ने इस वेबसीरीज में जान डाल दी है। इसके दो पार्ट आए हैं। …खैर, वर्तमान में चुनाव पर लौटते हैं। बिजनौर नगर पालिका इस बार भी महिला के लिए आरक्षित की गई है। यहां इन दिनों चेयरपर्सन पति की चर्चा खूब हो रही है। इसी के साथ चेयरपर्सन पापा की भी चर्चा है। लेकिन, ज्यादा चर्चा चेयरपर्सन मम्मी की है। मम्मी का राजनीतिक कद पापा से बड़ा रहा है। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती। चेयरपर्सन मम्मी से भी बड़ा एक पद है, चेयरपर्सन अंकल का। इनको चेयरपर्सन खालू भी कहा जा रहा है। यह चेयरपर्सन खालू जिले के बड़े चाणक्यों में शुमार होते है। कुछ दिन पहले तक प्रदेश के एक बड़े नेता के घर के बाहर लाइन में लगे हुए इनका वीडियो भी वायरल हुआ था। जनता का कहना है कि चेयरपर्सन तक जाने के लिए पहले चेयरपर्सन खालू फिर चेयरपर्सन मम्मी तक जाना होगा। चेयरपर्सन मम्मी का आदेश ही चेयरपर्सन मानेगी। ऐसे में तीन कड़ियों से गुजरने से अच्छा है कि दो या एक कड़ी वाले को ही चेयरपर्सन चुन लिया जाए।

सत्ता की चाबी मिस्टर ट्वेंटी पर्सेंट के पास

नगर पालिका चेयरमैन नगर का प्रथम नागरिक होता है। इस सम्मान के प्रतीक स्वरूप उसके पास नगर की चाबी होती है। कहा जा रहा है कि इस बार बिजनौर नगर पालिका की चाबी मिस्टर ट्वेंटी पर्सेंट के पास है। यह मिस्टर एक नेता हैं। सुनने में आया है कि इनके पास हर काम का रेट फिक्स है। काम के अनुसार यह अपना रेट तय करते हैं। इसलिए पार्टी में इनको यह नाम दिया गया है। यह अपनी पार्टी से अपने एक विरोधी की पत्नी के टिकट की पैरवी कर उसको प्रत्याशी बनवाकर लाए हैं। अब कमीशन के खेल में अंदरखाने दूसरी पार्टी को सपोर्ट कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह इस खेल से दो निशाने साध रहे हैं। एक तो अपनी पार्टी में अपने विरोधी को सदा के लिए चित कर देने की जुगत भिड़ाए हैं, दूसरे अपनी पर्सेंट छवि को बनाए रखने की चाल भी चल दी है। फिलहाल इनका रुख अभी तक पार्टी विरोधी दो प्रत्याशियों के पक्ष में झूलता दिख रहा है। …लेकिन, कहा जा रहा है कि ऐन मौके पर इन्होंने जिसको इशारा कर दिया, वही सत्ता की चाबी ले जाएगा।

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