अपने बूते जीतने की गलतफहमी में जी रहे कुछ जनप्रतिनिधि
भाजपा संगठन के कुछ पदाधिकारी और नेताओं को भी है यही गलतफहमी
पार्टी प्रत्याशियों को ही हराने में जुटे भाजपाई!
उरई (जालौन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुनामी के चलते जिले के ज्यादातर जनप्रतिनिधि चुनाव जीत के आए हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनमें से कुछ को यह गलतफहमी हो गई है कि वह अपने बलबूते पर चुनाव जीते हैं और वह जिसे चाहे हरा और जिता सकते हैं। जबकि सच्चाई यह है यदि मोदी की सुनामी ना होती तो अधिकांश जनप्रतिनिधि चुनाव हार गए होते और पार्टी की आखिरी लाइन में बैठे होते। सत्ता में होने के कारण यही गलतफहमी भाजपा संगठन के कुछ पदाधिकारी और नेताओं को भी है, जिसका परिणाम है जालौन जिले की चारों नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की सीटों पर भाजपा नेतृत्व ने जिन नेताओं को प्रत्याशी बनाया है, उन्हें कुछ जनप्रतिनिधि और भाजपा संगठन के कुछ नेता गोपनीय ढंग से उन्हें हराने की साजिश में जुटे हुए हैं, जबकि इन नेताओं को यह पता नहीं है कि इस समय स्थानीय निकाय के चुनाव में अपने कुछ साहसिक कारनामों की वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तूफान चल रहा है। इसलिए यदि योगी आदित्यनाथ का तूफान और जनता का भाव यदि भाजपा नेतृत्व द्वारा चयनित प्रत्याशियों के पक्ष में हो जाता है तो फिर यह कुछ जनप्रतिनिधि और भाजपा संगठन के कुछ नेता किसी भी हालत में अपनी साजिश और मंसूबों में सफल नहीं हो पाएंगे।

बात उरई नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की करें तो भाजपा नेतृत्व में भाजपा की जिला उपाध्यक्ष रेखा वर्मा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया है। वह कोरी बिरादरी की हैं, जो कई दशकों से भाजपा का आभार वोट रहा है। भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधि और कुछ संगठन के नेता यह नहीं चाहते कि रेखा वर्मा चुनाव जीते क्योंकि पूरी बिरादरी होने के कारण यदि वह चुनाव जीत जाती हैं तो आगे कुछ जनप्रतिनिधियों के लिए खतरा बन सकती हैं। इसीलिए भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधि और संगठन के नेता अच्छे और समर्पित किंतु गरीब कार्यकर्ताओं की सही बात को अनसुना करके रेखा वर्मा के खिलाफ साजिश और षड्यंत्र करने में लगे हुए हैं लेकिन योगी आदित्यनाथ का तूफान उनके मंसूबों को धराशाई करने के लिए काफी है।
इसी तरह कालपी नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर भाजपा नेतृत्व ने पहली बार अपने कर्मठ कार्यकर्ता व नेता रमेश तिवारी को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया है। उनके नाम की घोषणा होते ही सबसे पहले वैश्य समाज के वरिष्ठ नेता नवीन गुप्ता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया जबकि वैश्य समाज के ही एक अन्य वैभव विश्नोई; विद्रोही प्रत्याशी के रूप में निर्दलीय रूप से नामांकन कर चुनाव मैदान में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में क्योंकि भाजपा नेतृत्व ने पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान को अपने सहयोगी संगठन निषाद पार्टी से टिकट दिया था और वह चुनाव हार गए। उन्हें समाजवादी पार्टी के विनोद चतुर्वेदी ने पराजित किया, जिसके चलते कुछ जनप्रतिनिधि और भाजपा संगठन के नेता गोपनीय ढंग से यह प्रचार कर रहे हैं कि ब्राह्मणों का वोट पार्टी को नहीं मिला था इसलिए सहयोगी दल का प्रत्याशी चुनाव हारा। इसलिए हम लोग भाजपा प्रत्याशी रमेश तिवारी को आसानी से पालिका अध्यक्ष नहीं बनने देंगे, लेकिन हकीकत यह है कि योगी का तूफान और प्रधानमंत्री मोदी की छवि पूरे सवर्ण समाज और ओबीसी को एकजुट करने में सफल हुई है, जिसके चलते अपने को बड़ा मानने वाले भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधि और संघ भाजपा संगठन के कुछ अहंकारी नेता भले ही गोपनीय रूप से साजिश रच रहे हों लेकिन भाजपा के प्रति प्रतिबद्ध मतदाता उनके मंसूबे को हवा में उड़ाने में सक्षम है।

वहीं कोंच नगर पालिका में भाजपा नेतृत्व ने अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के कर्मठ और मृदुभाषी नेता प्रदीप गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है। यहां विज्ञान विशारद सिरोठिया निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। बजरंग दल के नेता आकाश उदैनिया भाजपा प्रत्याशी को हराने और विज्ञान विशाल सिरोठिया को जिताने में गोपनीय तौर पर लगे हुए थे। इसकी शिकायत पहुंचने पर उदैनिया को भाजपा से हटा दिया गया, जिसके बाद वे खुलकर अब विज्ञान विशारद सिरोठिया को जिताने में अपने साथियों के साथ जुट गए हैं। इसी तरह भाजपा संगठन के कुछ नेता अपने प्रत्याशी प्रदीप गुप्ता की जगह अन्य प्रत्याशी को जिताने में व अपने ढंग से भितरघात करने में लगे हुए हैं।
इसी तरह जालौन में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के भाजपा ने श्रीमती नेहा मित्तल को प्रत्याशी बनाया है। उनकी भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं के साथ साथ आमजन में भी अच्छी छवि है। उन्हें हराने के लिए भाजपा के एक प्रमुख नेता ही भितरघात करने में लगे हुए हैं क्योंकि वह अपने किसी करीबी को टिकट दिलवाना चाहते थे। लेकिन सत्ता के मद में डूबे हुए भाजपा के यह कुछ नेता भूल गए हैं कि उन्हें सत्ता, पद और वैभव पर किसी ने बैठाया है तो वह मोदी और योगी की सुनामी ने बैठाया है। अगर वह संगठन के साथ दगाबाजी करेंगे तो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उन्हें इतिहास के कूड़ेदान में फेंकने में देर नहीं करेगा।
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