एक अन्य महिला कर्मी का भी यही हाल
पोस्टिंग होने के बाद भी नहीं आती पशु चिकित्सा अधिकारी
बिजनौर/नगीना (विकास शर्मा)। राजकीय पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सा अधिकारी के महीने में एक या दो बार ही आने से पशु पालकों एवं आएदिन घायल होने वाले छुट्टा पशुओं के उपचार कराने में परेशानी हो रही है।
नगीना स्टेशन रोड पर राजकीय पशु चिकित्सालय में करीब 1 वर्ष से तैनात मेरठ निवासी पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर श्रीमती नीलम महीने में दो बार ही आती हैं। जहां चिकित्सक की गैरमौजूदगी में पशु पालकों को अपने बीमार पशुओं का उपचार कराना दुश्वार हो रहा है वहीं नगर और आसपास के मार्गों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं, जो बीमारी के साथ- साथ घायल भी हो रहे हैं, उनको जब पशु चिकित्सालय ले जाया जाता है तो वहां पशु चिकित्सा अधिकारी नहीं होने से उपचार नहीं हो पाता है। इस कारण पशुपालकों व आमजन ने पशु चिकित्सा अधिकारी के प्रति आक्रोश पनप रहा है।
पशु पालकों से मनचाही फीस और दवा तक के पैसे वसूल रहा कंपाउंडर
बताया गया है कि कंपाउंडर महिंद्र के सहारे ही पशु चिकित्सालय चल रहा है। आरोप है कि पशु चिकित्सा अधिकारी के नहीं आने से कंपाउंडर महिंद्र भी उपचार कराने आने वाले पशु पालकों से मनचाही फीस और दवा तक के पैसे वसूल रहा है। तमाम शिकायतों के बावजूद कोई सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा।

कब आती है और कब जाती है महिला कर्मचारी?
यही हाल पशु चिकित्सालय की एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी का है। सहारनपुर निवासी उक्त महिला कर्मचारी ड्यूटी पर कब आती है, कब जाती है, किसी को पता ही नहीं चलता। यहां कर्मचारी केवल अपनी हाजिरी लगाने आते हैं, जिसका प्रमाण सूचना बोर्ड पर अधिकारी कर्मचारियों के नाम और मोबाइल नंबर नहीं लिखे होना है। बताते हैं कि अब तक जितने भी पशु चिकित्सा अधिकारी नगीना में तैनात रहे हैं, वह सब चिकित्सालय परिसर में बने आवासों पर ही रहे हैं।
नगर के समाजसेवी इरशाद अहमद, तालिब अहमद, मोनू कुमार, जगदीश कुमार, मनोज कुमार एवं पशु पालकों ने जिला पशु चिकित्सा अधिकारी मुकेश कुमार गुप्ता से कई बार शिकायत की लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही होने से स्टाफ के हौसले बुलंद हैं। इस संबंध में जिला पशु चिकित्सा अधिकारी का मोबाइल स्विच ऑफ होने से संपर्क नहीं हो सका।
Leave a comment