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सीएमओ कार्यालय की कृपा से बदस्तूर जारी है गोरखधंधा

बिना पंजीकरण का नवीनीकरण कराए ही संचालित हो रहे अधिकांश अस्पताल

बिजनौर। जनपद में अधिकांश अस्पताल बिना पंजीकरण का नवीनीकरण कराए ही संचालित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट यूपी health.in पर नवीनीकरण आवेदन करने के बाद सभी आवश्यक अभिलेख की हार्ड कॉपी सीएमओ कार्यालय में 31 मई तक जमा करवानी थी। खास बात यह है कि नवीनीकरण न होने पर अस्पताल का पंजीकरण भी निरस्त करने का प्रावधान किया गया। इसके बावजूद बिजनौर सीएमओ कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों की कृपा से सब गोरखधंधा बदस्तूर जारी है।

महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के पत्र के अनुसार जनपद में 50 बेड से कम निजी चिकित्सा इकाइयां, नर्सिंग होम, हॉस्पिटल व पैथोलॉजी सेंटर का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन पोर्टल up-health.in के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए संबंधित चिकित्सक या नर्सिंग होम संचालक को up-health.in पोर्टल पर चिकित्सकीय संस्था के लिए मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपलोड करना होगा। वहीं 50 बेड से अधिक के अस्पतालों, नर्सिंग होम या अन्य संस्थानों को दूसरे पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाएगा। इस तरह के चिकित्सा संस्थानों को अपने सभी दस्तावेज clinicalestablishment.gov.in पर अपडेट व अपलोड करना है।

उत्तर प्रदेश के निजी अस्पताल, क्लीनिक संचालकों को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के अनुसार 50 बेड या उससे कम बेड वाले निजी अस्पताल संचालक अपने अस्पताल या क्लीनिक के पंजीकरण का नवीनीकरण अवश्य करा लें, नहीं तो अस्पताल का पंजीयन निरस्त कर दिया जाएगा। इसके लिए 31 मई तक समय निर्धारित किया गया। इस अवधि के भीतर उन्हें पंजीकरण कराना अनिवार्य बताया गया था। इसके बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह आदेश सभी चिकित्सा पद्धति के अस्पतालों में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड सेंटरों के लिए मान्य होगा।

नवीनीकरण आवेदन स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित पूर्व की वेबसाइट यूपी health.in पर करना था। नियमानुसार ऑनलाइन आवेदन हो जाने के बाद सभी आवश्यक अभिलेख संचालक या प्रबंधन का शपथपत्र, बायोमेडिकल वेस्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा अग्निशमन का अनापत्ति प्रमाण पत्र की हार्ड कॉपी सीएमओ ऑफिस के पंजीकरण इकाई में उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

इसके बावजूद बिजनौर सीएमओ कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों की कृपा से सब गोरखधंधा बदस्तूर जारी है। जनपद में हजारों की संख्या में निजी अस्पताल, क्लीनिक, अल्ट्रा साउंड सेंटर, शिक्षण संस्थान आदि संचालित किए जा रहे हैं और विभाग आंख मूंद कर बैठा है। आरोप है कि इस संबंध में जारी शासन के आदेश की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप तो यहां तक हैं कि सेटिंग गेटिंग के खेल में माहिर खिलाड़ियों के बलबूते ही शासन को भारी राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही है।

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