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आखिरकार क्यों नहीं रुक रही खाद्य पदार्थों में मिलावट

दूध, घी, मावा, धनिया, मिर्च पाउडर, जिंजर पाउडर, बेसन, बूंदी के लड्डू और आन्टी स्वीटी सुपारी तक शामिल

खाद्य पदार्थों के नमूने फेल निकलने पर 28 मुकदमों में जुर्माना ₹ 16 लाख

बिजनौर। जुलाई माह में खाद्य पदार्थों के नमूने फेल निकलने पर 28 मुकदमों में 16 लाख 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। अपर जिलाधिकारी कोर्ट से इन वादों के निस्तारण में यह अर्थदंड लगाया गया।

जिले में खाद्य विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं। विभाग की ओर से लिए गए इन खाद्य पदार्थों के नमूने की जांच रिपोर्ट समय-समय पर आती रहती है। इनमें अधोमानक से लेकर मिसब्रांडेड तक के मामलों में अलग-अलग अर्थदंड का निर्धारण किया जाता है।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजीव सिंह के अनुसार अय्यूब भोगनवाला के अधोमानक मावे के लिए 25 हजार रुपए और अधोमानक बेसन के लिए 30 हजार रुपए, महबूब भोगनवाला के अधोमानक दूध के लिए 25 हजार व बूंदी के लड्डू के लिए 30 हजार, शकील नई बस्ती बिजनौर के अधोमानक दूध के लिए एक लाख रुपए, जुल्फकार निवासी जुलाहान बिजनौर व विक्रम सेल्स बरेली तथा एसकेबी इंडस्ट्रीज इंदौर पर मिसब्रांडेड आन्टी स्वीटी सुपारी के लिए 2 लाख 15 हजार रुपए, रंजा पुत्र यूसुफ निवासी गनौरा कोतवाली देहात पर अधोमानक मावे के लिए 25 हजार रुपए, शबूर आलम शेरकोट पर अधोमानक कचरी व मिर्च पाउडर के लिए 50- 50 हजार रुपए, दीपांकर अग्रवाल निवासी जाटान बिजनौर व पुष्प ब्रांड इंदौर पर जिंजर पाउडर में नियमों के उल्लंघन में एक लाख रुपए जुर्माना किया गया है।

यामीन नगीना पर धनिया पाउडर के लिए 20 हजार रुपए, मोहम्मद बिलाल कोतवाली देहात पर अधोमानक मिक्स दूध के लिए 20 हजार रुपए, मोहम्मद अकील चांदपुर पर अधोमानक मिक्स दूध के लिए 60 हजार रुपए, अधोमानक घी निकलने पर मोहम्मद तबरेज हल्दौर तथा वितरक विष्णु एंड कंपनी हल्दौर व निर्माता वीआरएस फूड्स लिमिटेड बुलंदशहर पर 3 लाख 50 हजार रुपए जुर्माना किया गया है।

आखिरकार क्यों नहीं रुक रही खाद्य पदार्थों में मिलावट

बावजूद विभागीय छापामारी, आम जनमानस के दिलो दिमाग में यह सवाल कौंधता रहता है कि आखिरकार खाद्य पदार्थों में मिलावट रुकने का नाम क्यों नहीं ले रही है। इसका एक कारण ये है कि बहुत सी चीजों की मांग इतनी बढ़ गई है कि उसकी पूर्ति सम्भव नहीं है। जब पूर्ति सम्भव नहीं तो मात्रा बढ़ाने के लिए मिलावट का सहारा लिया जाता है। दूसरी बात ये है कि लोग सस्ते सामान पसंद करते हैं। मिलावट करके दुकानदार सस्ती चीजें दे देते हैं। सरकार को खाद्य पदार्थों की समय-समय पर जांच करवाना चाहिए। यही नहीं लोक स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण सरकार को इस विषय पर गंभीर होकर सोचना चाहिए। भ्रष्ट अफसरों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए, जो महज खानापूर्ति करके दोषियों को सरंक्षण देते हैं।

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