धरती का भगवान माने जाने वाले की शर्मनाक करतूत
भर्ती कराने के एवज में जमा कराई मोटी रकम
हंगामा होने पर अस्पताल को लौटानी पड़ी फीस
मरे हुए मरीज को भर्ती कर शुरू कर दिया इलाज!

बिजनौर। वास्तव में पुरानी कहावत सही है कि एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है। ऐसे लोगों की वजह से ईमानदार लोग नाहक ही बदनाम होते हैं। ऐसे ही मानवता को तार तार करने वाली एक शर्मनाक घटना जिला मुख्यालय पर कुछ ही अर्से पहले खुले एक अत्याधुनिक अस्पताल में घटी। मृत घोषित कर दिए गए बुखार की चपेट में आए एक वृद्ध को मोटी रकम कमाने के चक्कर में यहां भर्ती कर लिया गया। परिजनों की जागरूकता के चलते पोल खुली तो हंगामा शुरू हो गया। आखिरकार मामला दबाने के लिए अस्पताल प्रबंधन को रकम वापस लौटानी पड़ी।

जानकारी मिली है कि जिला मुख्यालय बिजनौर के मोहल्ला चाहशीरी निवासी मोहम्मद अमी (72) बुखार की चपेट में आ गया। परिजनों ने बीमार को इलाज के लिए एक चिकित्सक के यहां दिखाया। बुधवार शाम अचानक बीमार वृद्ध ने दम तोड़ दिया। चिकित्सक द्वारा हार्ट फेल होने से उसे मृत घोषित करने के बावजूद परिजन विश्वास न कर सके। फिर बड़ी आस लेकर परिजन उसे कुछ ही अर्से पहले खुले एक अत्याधुनिक अस्पताल ले गए। आरोप है कि शुरुआती परीक्षण किया गया और आनन फानन में बेहतर इलाज के लिए करने का झांसा देकर मरीज के शव को भर्ती कर लिया गया। यही नहीं हॉस्पिटल के नियमों का हवाला देकर भर्ती करने की निर्धारित फीस भी जमा करा ली।

… लेकिन मानवता अभी तक है जिंदा
तालाब की मछली वाली कहावत की ही तरह एक और है कि इंसानियत अभी मरी नहीं, जिंदा है। बताया गया है कि अस्पताल स्टाफ के एक व्यक्ति की अंतरात्मा जाग उठी और उसने परिजनों के सामने असलियत बयां कर दी। इसके बाद तीमारदारों ने ईसीजी की रिपोर्ट मांगी तो अस्पताल प्रबंधन टालमटोल करने लगा। वहीं जानकारी मिलते ही मोहल्ले के सैकड़ों लोगों ने अस्पताल पहुंच कर हंगामा शुरू कर दिया। आखिरकार अस्पताल प्रबंधन को बैकफुट पर आना पड़ा और जमा कराई गई रकम वापस लौटाने के साथ ही मृत व्यक्ति का शव परिजनों को सौंप दिया।
जांच कर होगी कार्रवाई: डिप्टी सीएमओ
इस मामले में डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेंद्र विश्वकर्मा ने मामला संज्ञान में नहीं होने की बात कहते हुए जांच कर कार्रवाई की बात कही है।
क्या सीएमओ या उच्च स्तर से जांचे जाएंगे अस्पताल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, भर्ती करने से लेकर फीस जमा कराने, दवाइयों आदि के पर्चे, बिल आदि बहुत कुछ है खुलासा करने को? परिजनों आदि के भी बयान? कहानी अभी बाकी है…
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