बस्ती, महोबा, मुरादाबाद, बिजनौर, उन्नाव और संभल में मिले सबसे ज्यादा फर्जी छात्र
यूपी में कुल 359659 छात्रों ने किया था आवेदन
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के 14 हजार आवेदक निकले फर्जी
लखनऊ (एजेंसियां)। केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में प्रदेश के 14 हजार आवेदक फर्जी निकलने से हड़कंप मचा हुआ है। आधार प्रमाणीकरण कराने के दौरान इस गड़बड़झाले की पोल खुली। सबसे ज्यादा फर्जी छात्र बस्ती, मुरादाबाद, महोबा, उन्नाव, संभल और बिजनौर में मिले हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने 2022-23 में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने वाले छात्रों का बायोमेट्रिक सत्यापन करने का निर्देश सभी राज्यों को दिया था।

उत्तर प्रदेश में कुल 359659 छात्रों ने आवेदन किया था। इसमें से 2,62,196 विद्यार्थियों ने ही प्रमाणीकरण कराया। कई बार मौका दिए जाने के बावजूद 97,463 विद्यार्थी प्रमाणीकरण कराने नहीं आए। वहीं इन छात्रों का डाटा अग्रसारित करने वाले संस्थानों ने अब इनको अपना छात्र मानने से इन्कार कर दिया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के राज्य नोडल अधिकारी एसएन पाण्डेय के अनुसार प्रमाणीकरण के दौरान 17,473 छात्रों का नाम आधार में दिए गए नाम से अलग मिला, जबकि 11,377 छात्रों का आधार सत्यापन फेल हो गया। 93 आवेदकों की मृत्यु हो गई है। मोबाइल नंबर अपडेट होने या नाम बदलने के कारण 8,466 आवेदकों का डाटा का मिलान नहीं हो पाया है। वहीं 2510 आवेदनों में आधार का विकल्प ही नहीं मिला है। 41,468 आवेदक अब संस्थान छोड़कर जा चुके हैं। जांच में करीब 14 हजार आवेदक फर्जी मिले। अब संस्थान इनके बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं, जबकि इन्हीं संस्थानों ने ही इन छात्रों का डाटा अग्रसारित किया था। प्रदेश सरकार जल्द ही पूरी रिपोर्ट केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय को भेजेगी। इसके बाद ही उन शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जहां से इन छात्रों ने आवेदन किया था।
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