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अनाधिकृत चिकित्सक के प्रमाण पत्र से ले रहे हैं मेडिकल लीव

घूमने फिरने के लिए बीमार हो रहे हैं मास्साब!

~रोहित चौधरी

बिजनौर। शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद के प्रतिदिन आने वाले नए नए आदेशों से भले ही शिक्षक परेशानी का सामना कर रहे हों, लेकिन विभाग में कुछ ऐसे भी शिक्षक मौजूद हैं, जिनकी वजह से ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षक भी कम परेशान नहीं है।

पहले सीएल और फिर मेडिकल अवकाश का फायदा…

शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद जिस तरह से बेसिक शिक्षकों के पीछे पड़े हुए हैं, उससे शिक्षक काफी मानसिक तनाव में हैं। कुछ शिक्षक ऐसे भी है, जो अपने घूमने फिरने के शौक पहले अपनी सीएल से करते हैं, लेकिन शौक पूरा ना होने पर अपने मेडिकल अवकाश का फायदा उठाते हैं। उनके साथी शिक्षक उनके इस कदम से नाराज़ दिखाई देते हैं।

फेसबुक व व्हाट्सएप स्टेट्स खोल देते हैं पोल

बार-बार के मेडिकल अवकाश लेने से शिक्षक बीमार तो नजर नहीं आते बल्कि उनके फोटो फेसबुक व व्हाट्सएप स्टेट्स पर उनकी बीमारी की कहानी कुछ और ही बयां करते है। शिक्षकों का कहना है कि उनके साथी शिक्षकों की वजह से ही आज अधिकारियों व बच्चों के अभिभावकों का विश्वास अध्यापकों पर से उठता जा रहा है। अधिकतर शिक्षक बच्चों को अधिक से अधिक समय देकर उन्हें पढ़ाना चाहते हैं। वह अपने ऊपर लगे आरोपों के कलंक को मिटाना चाहते हैं, लेकिन उन्ही के बीच के कुछ ही अध्यापक ऐसे हैं, जो अपने दायित्वों को नहीं निभा पा रहे हैं। कुछ शिक्षक स्कूल से कोई ना कोई बहाना बनाकर गायब हो ही जाते हैं। ऐसे अध्यापक के ऊपर किसी भी अफसर का आदेश कोई मायने नहीं रखता। अब तो यह भी देखा जा रहा है कि स्कूलों से गायब रहने के आदी शिक्षक बीमार बनकर अपना फर्जी बीमारी का सर्टिफिकेट लगाकर छुट्टी मंजूर करा लेते हैं।

सीएमओ कर सकते हैं बीमारी की जांच

ऐसे शिक्षकों को इस बात का भी भय नहीं रहता कि बार बार बीमार होने पर सीएमओ द्वारा उसकी बीमारी की जांच की जा सकती है। शिक्षक घर बैठने की चाह में यह भूल जाता है कि कहीं वह छुट्टी के लिए चिकित्सक का अनाधिकृत सर्टिफिकेट तो नहीं लगा रहा। कुल मिलाकर अपने दायित्वों से भागने वाले शिक्षक भी विभाग को बदनाम करने में पीछे नहीं हैं। बताया जाता है कि ऐस शिक्षकों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है, जो वर्ष भर में बीमार रह कर घर बैठ कर मौज मारने के आदी हैं। अब ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर कब कार्यवाही होगी, जो अपने ही साथियों को अफसरों की नजर में बदनाम करने में तुले हैं, यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है।

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