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हमने रोती हुई आंखों को हंसाया है सदा, इससे बेहतर तो इबादत हमसे हो नहीं सकती: जमील अंसारी

इबादत से कम नहीं लोगों की मदद करना: जमील अहमद अंसारी

~प्रशांत कुमार, कोतवाली देहात

बिजनौर। लोगों की मदद करना सबसे बड़ा पुण्य का काम होता है, यह बात तो हम सभी जानते हैं लेकिन आज के इस युग में कोई किसी की मदद करने को तैयार नहीं है। इसके बावजूद कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम स्यालु नंगला के जमील अहमद अंसारी लोगों की सहायता करने के लिए इन दिनों खूब चर्चाओं में हैं। उनका मानना है कि इंसानियत हर धर्म पर भारी है।

स्यालु नंगला निवासी जमील अहमद अंसारी लोगों की मदद करने के लिए सबसे आगे खड़े दिखाई देते हैं। वो इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं, उनका मानना है कि लोगों की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है और पुण्य का काम भी। जमील अहमद अंसारी गरीब लोगों की सहायता के लिए हमेशा बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इंसान की मदद करना भी एक इबादत है। उन्होंने संपन्न लोगों से अपील करते हुए कहा कि एक दूसरे के दुःख सुख में शामिल होकर अपनी हैसियत अनुसार लोगों की मदद को आगे आएं और बेसहारों का सहारा बनें। आखिर में कुछ इस अंदाज में अपनी बात रखी… “हमने रोती हुई आंखों को हसाया हैं सदा, इससे बेहतर तो इबादत हमसे हो नहीं सकती।”

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