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03 की जगह 05 हजार रुपए न देने पर रोज ही रही थी बर्बर तरीके से पिटाई?

गंभीर हालात में कराया गया जिला अस्पताल में भर्ती

जेल: पिटाई से परेशान कैदी ने की आत्महत्या की कोशिश!

बिजनौर। जिला कारागार में रंगदारी न देने पर एक कैदी ने चाकू मारकर आत्महत्या की कोशिश की है। गंभीर हालात में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया है। वहां वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। जेल के अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।

सर्वविदित है कि सभी जिला कारागार में बंदियों से काम कराया जाता है। जैसा काम, वैसा दाम। रसोई, बागवानी, साफ सफाई आदि सभी काम बंदियों, कैदियों से कराए जाते हैं। इसके बदले उन्हें मेहनताना भी अदा किया जाता है। यही सब कुछ बिजनौर के जिला कारागार में भी हो रहा है।

सूत्रों का कहना है कि बिजनौर जिला कारागार पहले काम न करने के एवज में प्रति माह रुपए तीन हजार वसूले जाते थे। अब ये रकम बढ़ाकर पांच हजार रुपए कर दी गई है। उक्त कैदी तीन हजार रुपए तो दे देता था लेकिन पांच हजार रुपए नहीं दे पा रहा था। इस वजह से उसे सुबह, दोपहर और शाम बर्बर तरीके से पीटा जा रहा था। आखिरकार उसने अपनी जिंदगी ही खत्म करने की ठान ली। शनिवार सुबह उसने खुद के शरीर पर चाकू (धारदार हथियार) के कई वार किए। गंभीर हालत देख जेल में हड़कंप मच गया। आनन फानन में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। बताया गया है कि लूट के दौरान हत्या के मामले में गाजियाबाद में उसे गिरफ्तार किया गया था। वह करीब तीन साल से गाजियाबाद की डासना जेल में बंद था। उसे तीन नवंबर 2023 को गाजियाबाद से बिजनौर जेल शिफ्ट किया गया था।

फोन रिसीव नहीं करते अधिकारी

इस मामले में कारागार प्रशासन कुछ भी कहने से कतरा रहा है। जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर, किसी ने भी फोन कॉल रिसीव करना गवारा न किया। आखिरकार जेल अधीक्षक अदिति श्रीवास्तव ने कॉल रिसीव की और कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ। साधारण तरीके से कारागार के अस्पताल में जांच हुई, बीमारी की वजह से उसे जिला अस्पताल भेजा गया है।

जेल में पहुंचा कैसे चाकू?

सवाल ये है कि आखिरकार जेल के भीतर चाकू पहुंचा कैसे? या फिर किसी चीज को उसने नोकिला और धारदार बना लिया। बताया जाता है कि जेल गेट पर किसी भी चैकिंग सही से नहीं की जाती। मिलाई के दौरान भी एहतियात नहीं बरती जाती। निचले कर्मचारियों की जवाबदेही का खामियाजा बड़े अधिकारियों को भुगतना पड़ सकता है।

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