
“पैसों से खबरें छपवाकर क्रांति करने का जज्बा” मीडिया के सहयोग के बिना क्या आज किसी राजनैतिक पार्टी और आन्दोलन का अस्तित्व सचमुच संभव नहीं रह गया। इस बारे में याद आता है 90 का दशक, जब अखबारों के ज्यादातर पाठक सवर्ण बिरादरी के थे। मुसलमानों में भी अखबारों की पहुंच बहुत कम थी। जाहिर […]
“पैसों से खबरें छपवाकर क्रांति करने का जज्बा”
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