कुछ चीजें थी जो पैदा कर सकती थीं अड़चन
अखिलेश की 7 छोड़ बीजेपी की 2 सीट पर क्यों माने जयंत चौधरी ?
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“मैं व्यक्तिगत तौर पर किसी सीट या किसी नेता के बारे में नहीं बोलूंगा. राजनीतिक कुछ मामले होते हैं, हर पार्टी के नेता को अपने दल के लिए सोचना पड़ता है” ~ जयंत चौधरी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने पहली बार I.N.D.I.A गठबंधन छोड़कर बीजेपी नीत वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने के बाद खुलकर अपनी बात रखी. एबीपी के स्पेशल शो घोषणापत्र में रालोद मुखिया जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी के साथ हुए गठबंधन के टूटने पर भी अपनी चुप्पी तोड़ी है.

जयंत चौधरी ने उस सवाल का भी जवाब दिया जिसमें पूछा गया कि सपा की सात सीट की डील पर बीजेपी के साथ 2 सीट के फॉर्मूला पर वह क्यों माने. जब जयंत चौधरी से पूछा गया कि सपा लोकसभा चुनाव के लिए सात सीट दे रही थी बीजेपी ने दो सीटें दीं तो आप बीजेपी छोड़कर दो सीट पर क्यों राजी हो गए. इस पर रालोद मुखिया जयंत चौधरी ने कहा वो गठबंधन क्यों टूटा इस पर मैं नहीं बताउंगा. वहीं जयंत चौधरी ने इसका भी जवाब दिया कि सिंबल रालोद का और उम्मीदवार सपा का ऐसा कुछ भी फॉर्मूला था क्या. जयंत ने कहा कि जो बातचीत नेताओं के बीच होती है वह वहीं तक रहनी चाहिए. अगर इन लक्ष्मण रेखा को कोई और फांद रहा है मैं नहीं फांदूगां.

वहीं जयंत चौधरी ने कहा कि मैं एक चीज क्लियर कर देना चाहता हूं कि सात नहीं थी वो 6 सीट रह गई थीं और उसमें भी कुछ चीजें थी जो अड़चन पैदा कर सकती थीं. हालांकि मैं व्यक्तिगत तौर पर किसी सीट या किसी नेता के बारे में नहीं कहुंगा. राजनीतिक कुछ मामले होते हैं, हर पार्टी के नेता को अपने दल के लिए कुछ सोचना पड़ता है. अखिलेश यादव ने हमें सहयोग दिया हमने उनका सहयोग दिया है, मेरे उनके पारवारिक रिश्ते हैं. इसके साथ ही जयंत ने उस सवाल का भी जवाब दिया कि 47 साल में यह पहली बार होगा कि चौधरी चरण सिंह के परिवार से कोई लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगा. जयंत चौधरी ने कहा कि इस बार का चुनाव बहुत आसान है और नतीजे सामने आएंगे तो आपको पता चल जाएगा. इस बार जो हवा चल रही है वह बहुत अलग है.
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