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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से शाहिद सिद्दीकी का इस्तीफा

भाजपा के नेता भी अटल जी के राज धर्म को बचाने के लिए आगे आएं

लोकसभा चुनाव से पहले RLD को बड़ा झटका

नई दिल्ली। राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शाहिद सिद्दीकी ने आगामी लोकसभा चुनाव से पहले ही सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सिद्दीकी ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफार्म एक्‍स पर ल‍िखा; मैंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को भेज दिया है। मैं ख़ामोशी से देश के लोकतांत्रिक ढांचे को समाप्त होते नहीं देख सकता। मैं जयंत सिंह जी और आरएलडी मैं अपने साथियों का आभारी हूं।

सिद्दीकी ने कहा, ”कल मैंने रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद और उसकी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मैं और मेरा परिवार इंदिरा के आपातकाल के खिलाफ खड़े हुए थे और आज उन सभी संस्थानों को कमजोर होते हुए चुपचाप नहीं देख सकते, जिन्होंने एकजुट होकर भारत को दुनिया के महान देशों में से एक बनाया है।”

https://x.com/shahid_siddiqui/status/1774664435317219698?t=I8D4r3mOe8usjSL0W9Z3CA&s=09

सोशल मीड‍िया प्‍लेटफार्म एक्‍स पर उन्होंने लिखा कि कल मैंने राष्ट्रीय लोक दल की सदस्यता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की पोस्ट से अपना त्यागपत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जयंत सिंह जी को भेज दिया है। आज जब भारत के संविधान और लोकतांत्रिक ढाँचा ख़तरे मैं है ख़ामोश रहना पाप है । मैं जयंत जी का आभारी हूँ पर भारी मन से आरएलडी से दूरी बनाने…
— shahid siddiqui (@shahid_siddiqui) April 1, 2024

सिद्दीकी ने कहा, ”आज जब भारत के संविधान और लोकतांत्रिक ढांचा खतरे मैं है, खामोश रहना पाप है। मैं जयंत जी का आभारी हूं, पर भारी मन से आरएलडी से दूरी बनाने के लिए मजबूर हूं। भारत की एकता, अखंडता विकास और भाईचारा सर्वप्रिए है। इसे बचाना हर नागरिक की ज‍िम्मेवारी और धरम है।”

भाजपा के नेताओं से भी विनती

उन्होंने कहा कि आज सवाल किसी एक दल का नहीं भारत के लोकतंत्र और राज धर्म को सुरक्षित करने का है। मैं भाजपा के नेताओं से भी विनती करूँगा की आप अटल जी के राज धर्म को बचाने के लिए आगे आएं।

जयंत चौधरी को संदेश…

इस्‍तीफे में शाहिद सिद्दकी ने लिखा है कि हमने पिछले छह वर्षों तक एक साथ काम किया है। एक-दूसरे का हम सम्‍मान करते हैं। मैं आपको अपना छोटा भाई मानता हूं। हम महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर और विभिन्‍न समुदायों के बीच भाईचारे और सम्‍मान का माहौल बनाने में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए हैं। हम दोनों धर्मनिरपेक्षता और जिन संवैधानिक मूल्‍यों को संजोते हैं उनके प्रति आपकी प्रतिबद्धता पर कोई संदेह नहीं कर सकता। आपके दिवंगत दादा, भारत रत्‍न चौधरी चरण सिंह जी, आपके दिवंगत पिता अजीत सिंह जी और आपके समय से, आप सभी और वास्‍तव में आपके द्वारा बनाई गई पार्टी इन मूल्‍यों के लिए खड़ी रही है।

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