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यूपी की 08 सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान

दूसरे चरण में कुल 89 सीट पर है चुनाव

13 राज्यों की 89 सीट पर दूसरे चरण का मतदान

दूसरे चरण में 89 सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान होना है। इनमें केरल की (20) सीट, कर्नाटक (14), राजस्थान (13), महाराष्ट्र (08), उत्तर प्रदेश (08), मध्य प्रदेश (07), असम (05), बिहार (05) पर मतदान होगा । इसके अलावा छत्तीसगढ़ (03), पश्चिम बंगाल (03), मणिपुर, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर में 1-1 सीट पर मतदान होगा।

पश्चिम उत्तर प्रदेश की आठ सीट

अठारहवीं लोकसभा के चुनाव के दूसरे चरण में यूपी की आठ सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान होगा। भाजपा ने 2019 में अमरोहा को छोड़ इस चरण की शेष सात सीटें जीती थीं। अमरोहा पर बसपा काबिज हुई थी। मिशन-80 का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा इस चरण की सभी सीटें जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है तो पिछले चुनाव में मात्र एक सीट जीत पाई बसपा के लिए अपनी सफलता को दोहराने की चुनौती होगी। आइएनडीआइए के तहत कोटे में आई 17 सीटों में से अब तक 15 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी कांग्रेस के लिए भी दूसरा चरण प्रतिष्ठापरक है। कांग्रेस इस चरण की आठ सीटों में से चार पर अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में है, जबकि शेष चार सीटों पर सपा ताल ठोंक रही है। इस लिहाज से दूसरा चरण सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए भी कसौटी साबित होगा।

अलीगढ़: ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखने वाले भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम तीसरी जीत का तानाबाना बुन रहे हैं तो बसपा ने भी पैंतरा बदल कर यहां सजातीय प्रत्याशी उतारा है। अपने मुस्लिम प्रत्याशी गुफरान नूर का टिकट काटकर उसने भगवा खेमा छोड़कर आए हितेन्द्र कुमार उर्फ बंटी उपाध्याय पर दांव खेला है। सपा ने जाट बिरादरी के पूर्व सांसद चौधरी बिजेन्द्र सिंह पर फिर भरोसा जताया है। अलीगढ़ सीट पर सर्वाधिक मुस्लिम मतदाता हैं। बावजूद इसके प्रमुख दलों का कोई मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में नहीं है। मुस्लिम मतों का झुकाव या बिखराव यहां के परिणाम पर असर डालेगा।

अमरोहा: वर्ष 1980 के बाद से किसी प्रत्याशी को लगातार दो बार लोकसभा न भेजने वाली यह सीट इसी तर्ज को कायम रखेगी या पिछले साढ़े चार दशक से चली आ रही परंपरा को तोड़ेगी, इस पर निगाहें लगी हैं। हाथी से उतरकर हाथ थामने वाले मौजूदा सांसद कुंवर दानिश अली मुस्लिम बहुल इस सीट पर साइकिल का साथ मिलने से दोबारा बाजी मारने के लिए कमर कस रहे हैं तो रालोद के साथ आने से भाजपा के कंवर सिंह तंवर भी ढोलक पर जोरदार थाप लगाकर 2014 की सफलता हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। मुस्लिमों की बड़ी तादाद वाली इस सीट पर बसपा उम्मीदवार मुजाहिद हुसैन मुकाबले का तीसरा कोण उभारने की कोशिश में लगे हैं।

बागपत: चौधरी चरण सिंह के परिवार का गढ़ रही इस सीट पर 47 वर्षों बाद इस परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा है। रालोद ने राष्ट्रीय सचिव राजकुमार सांगवान को उतारा है। सपा ने पहले पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी को और आखिरी दौर में साहिबाबाद के पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा को उतार दिया। बसपा ने दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता प्रवीण बंसल पर दांव लगाया है। भाजपा ने जाट, सपा ने ब्राह्मण और बसपा ने गुर्जर प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। पिछले दो चुनावों में यहां आमने-सामने रहीं भाजपा और रालोद के हाथ मिलाने से एनडीए समर्थक यहां हैंडपंप को मजबूत मान रहे हैं।

बुलंदशहर: अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट दो वर्तमान सांसदों के बीच चुनावी जंग की गवाह बनी हुई है। भाजपा ने यहां पिछली दो बार लगातार जीत दर्ज कर चुके भोला सिंह को जीत की हैट्रिक लगाने की मुराद पूरी करने का अवसर दिया है तो बसपा ने नगीना के सांसद गिरीश चंद्र को मैदान में उतार कर चुनावी संग्राम में गर्मी पैदा करने की कोशिश की है। कांग्रेस ने आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव शिवराम वाल्मीकि को प्रत्याशी बनाया है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव को अपवाद मान लें तो 1991 से अब तक भाजपा यहां अपराजेय रही है।

गाजियाबाद: पिछले दो बार के सांसद जनरल वीके सिंह की जगह मैदान में उतरे पूर्व राज्य मंत्री और गाजियाबाद के विधायक अतुल गर्ग इस सीट पर भाजपा की चौथी जीत के सूत्रधार बनने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं। वीके सिंह का टिकट कटने से ठाकुर बिरादरी की शुरुआती नाराजगी से पार पाने के लिए भाजपा को मशक्कत करनी पड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां रोड शो किया। कांग्रेस ने डाली शर्मा पर फिर भरोसा जताया है। बसपा ने अंशय कालरा का टिकट काटकर ठाकुर बहुल इस सीट पर इसी बिरादरी के नंद किशोर पुंडीर को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की है।

मथुरा: इस लोकसभा क्षेत्र में भाजपा सांसद हेमा मालिनी जीत की तिकड़ी लगाने की तैयारी में जुटी हैं तो उनकी राह रोकने के लिए कांग्रेस के मुकेश धनगर और जाट बिरादरी के सेवानिवृत्त आइआरएस अधिकारी सुरेश सिंह बसपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। कांग्रेस को पिछली बार यहां 20 वर्ष पहले सफलता मिली थी, जबकि बसपा का यहां अब तक खाता नहीं खुल पाया है। भाजपा ने अपने इरादे जता दिए हैं। मथुरा से प्रचार अभियान का श्रीगणेश कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह चुके हैं कि अपनी जन्मभूमि पर विराजित प्रभु श्रीराम ने होली खेली तो मथुरा-वृंदावन को भी इसका इंतजार है।

मेरठ: रामायण में प्रभु श्रीराम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल के बतौर भाजपा प्रत्याशी मैदान में उतरने से यह सीट चर्चा में है। गोविल मेरठ सीट पर भाजपा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल की जीत की हैट्रिक के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए पसीना बहा रहे हैं। सपा ने पहले यहां दलित बिरादरी के भानु प्रताप को प्रत्याशी बनाया, फिर सरधना विधायक अतुल प्रधान पर दांव लगाया, जिन्होंने नामांकन भी कर दिया और इसके चंद घंटों बाद शहर की पूर्व महापौर सुनीता वर्मा को मैदान में उतार दिया। बसपा ने देवव्रत त्यागी को उतारा है। मुसलमानों की बड़ी संख्या वाली सीट पर सपा व बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी से परहेज कर मुकाबले को रोचक बना दिया है।

गौतमबुद्ध नगर: यहां दो डाक्टरों के बीच चुनावी जंग में बसपा तीसरा कोण उभारने में जुटी है। पेशे से चिकित्सक सांसद डा. महेश शर्मा इस सीट से जीत की तिकड़ी बनाने के लिए मैदान में हैं। सपा ने पहले यहां डा. महेन्द्र नागर को प्रत्याशी बनाया, फिर राहुल अवाना को, लेकिन पांच दिन बाद ही फिर डा. महेन्द्र नागर पर भरोसा जताया। बसपा ने पार्टी सुप्रीमो मायावती के गृह जिले की सीट से पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह सोलंकी को उतारा है। तीनों पार्टियों ने अलग-अलग जातियों के उम्मीदवारों पर दांव खेला है। डा. महेश शर्मा ब्राह्मण हैं, वहीं डा. महेन्द्र नागर गुर्जर और राजेन्द्र सिंह सोलंकी ठाकुर हैं।

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