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अगर आप बिना किसी की इजाजत के फोन कॉल रिकॉर्ड करते हैं तो यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है और आपके खिलाफ पुलिस कार्रवाई हो सकती है।

बिना किसी की इजाजत के कॉल recording निजता के अधिकार का उल्लंघन


कॉल रिकॉर्डिंग करने पर लगती है कौन सी धारा ?

अगर आप किसी की इजाजत के बिना उसका मोबाइल कॉल रिकॉर्ड करते हैं तो आपके खिलाफ आईटी एक्ट-2000 की धारा 72 के तहत करवाई की जा सकती है। भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 में हर व्यक्ति के पास निजता का अधिकार है। अगर सरकार या कानूनी एजेंसियों को किसी व्यक्ति पर गैरकानूनी या देश विरोधी काम में लिप्त होने का खतरा होता है तो उसका फोन टैपिंग किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार राज्य जनहित में किसी की भी बातचीत को उसे बिना बताए रिकॉर्ड कर सकती है।

दूसरों का कॉल रिकॉर्ड करना पड़ सकता है महंगा, ऐसे कर सकते हैं कानूनी कार्रवाई

वर्ष 2021 में पेगासस की फोन टैपिंग सॉफ्टवेयर ने दुनिया भर में हंगामा बरपा दिया था, लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर फोन टैपिंग कैसे होती है। अगर कोई अनधिकृत तौर पर आपका फोन टैप किया तो उसे सजा भी हो सकती है।

दैनिक जागरण में जमशेदपुर डेटलाइन से 22 जुलाई 2021 को प्रकाशित जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट के अनुसार यदि आप मजाक में भी किसी दूसरे का कॉल रिकॉर्ड करते हैं और यदि इसकी शिकायत कर दी जाए तो आपको भारी महंगा पड़ सकता है। उस समय पेगासस स्पाइवेयर की मदद से भारतीय यूजर्स की जासूसी की रिपोर्ट पर जमकर हंगामा हुआ था। इससे पहले 2019 में भी भारत समेत दुनिया के 20 देशों में हो रहे पेगासस स्पाइवेयर को लेकर इजरायली स्पाइवेयर के निर्माता एनएसओ ग्रुप पर मुकदमा दायर किया था।

आखिर क्या है फोन टैपिंग ?

जमशेदपुर के जाने-माने वकील सुधीर कुमार पप्पू के अनुसार फोन टैपिंग के जरिए कोई राज्य या केंद्र सरकार तथा कानूनी एजेंसियां किसी व्यक्ति के फोन पर होने वाली बातचीत की निगरानी करती हैं। कानून के अनुसार किसी की भी बातचीत को रिकार्ड सुनना या दूसरे को सुनाना पूरी तरह गैर कानूनी है। यह निजता के अधिकार का हनन है। अगर सरकार या कानूनी एजेंसियों को किसी व्यक्ति पर गैरकानूनी या देश विरोधी काम में लिप्त होने का शक होता है तो उसका फोन टैपिंग किया जा सकता है। वैसे यह सब इतना आसान नहीं होता, इसके लिए बकायदा कानून बना हुआ है।

इस कानून के तहत होता है रेगुलेशन

इंडियन टेलिग्राफ एक्ट 1885 के सेक्शन 5(2) के तहत केंद्र या राज्य सरकार के पास फोन टैपिंग करने का अधिकार है। अगर सरकार या कानूनी एजेंसियों को किसी व्यक्ति पर गैरकानूनी या देश विरोधी काम में लिप्त होने का खतरा होता है तो उसका फोन टैपिंग किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार राज्य जनहित में किसी की भी बातचीत को उसे बिना बताए रिकॉर्ड कर सकती है। हालांकि, सामान्य परिस्थिति में किसी की भी बातचीत को उसकी बिना इजाजत के आर्टिकल 21 के तहत रिकार्ड करना गैरकानूनी है। उच्चतम न्यायालय के अनुसार आर्टिकल 21 के तहत जीवन का मूलभूत अधिकार दिया गया है और निजता का अधिकार उसका अखंड हिस्सा है।

कॉल रिकॉर्ड कर उसे दूसरे को सुनाना पड़ेगा महंगा

प्राय: देखने को मिलता है कि लोग आने वाले हर कॉल को रिकॉर्ड करते हैं। स्मार्टफोन के समय में तमाम ऐप्स ने यह बेहद आसान भी बना दिया है। बहुत सारे लोग किसी की कॉल को रिकॉर्ड कर उसे किसी दूसरे को सुनाते है लेकिन कानून की दृष्टि में यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। अगर आप किसी दूसरे का रिकॉर्ड रखते हैं और उसे पता चल जाता है तो वह आपके खिलाफ शिकायत कर सकता है। ऐसे में आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

कॉल रिकॉर्ड हो तो ऐसे करें शिकायत

यदि आपको लगता है कि कोई आपकी बातचीत को रिकार्ड कर रहा है तो आप इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग से कर सकते हैं। यदि आपको किसी पर शक है तो उसके खिलाफ थाने में एफआइआर दर्ज करा सकते हैं। यदि किसी अधिकारी ने केंद्र या राज्य सरकार के निर्देश पर कॉल रिकॉर्ड किया है और किसी ऐसे व्यक्ति को लीक कर दिया, जिसे नहीं करना चाहिए, ऐसी स्थिति में इंडियन टेलिग्राफ एक्ट के सेक्शन 26 बी के तहत आरोपित पर मुकदमा कर सकते हैं।

क्या कॉल रिकॉर्डिंग भारतीय अदालत में मान्य है?

हालाँकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को अदालत में स्वीकार किया जाता है, लेकिन भारत के संविधान, 1950 के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार के उल्लंघन और आपराधिक गतिविधि के बढ़ते जोखिम के कारण व्यक्तियों के लिए बिना अनुमति के बातचीत रिकॉर्ड करना कानूनी नहीं है।

हाईकोर्ट का फैसला: बिना इजाजत मोबाइल कॉल रिकॉर्ड करना निजता का उल्लंघन, हो सकती है 2 साल की सजा

(Recording mobile phone without permission is a violation of the right to privacy CG High Court
punishment for call recording in india)

अगर आप किसी की इजाजत के बिना उसका मोबाइल कॉल रिकॉर्ड करते हैं तो आपके खिलाफ आईटी एक्ट-2000 की धारा 72 के तहत करवाई की जा सकती है। भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 में हर व्यक्ति के पास निजता का अधिकार है। अगर आप दोषी पाएं जाते हैं तो इसके तहत दो साल की सजा और 01 लाख रुपए का जुर्माना है। वेबसाइट http://www.naidunia.com के मुताबिक छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि किसी व्यक्ति की जानकारी के बिना उसके मोबाइल फोन पर बातचीत को रिकॉर्ड करना अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन है। उच्च न्यायालय एक महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 2019 से लंबित रखरखाव मामले में उसके पति के आवेदन को अनुमति देने वाले पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। एचसी ने पाया कि पति द्वारा अपनी पत्नी की जानकारी के बिना उसकी फोन पर बातचीत रिकॉर्ड करना उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन है और साथ ही संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त याचिकाकर्ता के अधिकार का भी उल्लंघन है।

क्या कहता है कानून?

अगर आप किसी की इजाजत के बिना उसका मोबाइल कॉल रिकॉर्ड करते हैं तो आपके खिलाफ आईटी एक्ट-2000 की धारा 72 के तहत करवाई की जा सकती है। इस आईटी एक्ट के तहत किसी भी इलेक्ट्रानिक डिवाइस के जरिए किसी थर्ड पार्टी व्यक्ति की मंजूरी के बिना उससे जुड़ी सूचना, दस्तावेज जैसी चीजों को उसकी मंजूरी या जानकारी के बिना पब्लिक करना धारा-72 का उल्लंघन माना जाएगा। भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 में हर व्यक्ति के पास निजता का अधिकार है। अगर आप दोषी पाएं जाते हैं तो इसके तहत दो साल की सजा और 1 लाख रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

(विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित लेख। यह आवश्यक नहीं है कि newsdaily24 उक्त जानकारी से पूर्णतया अथवा आंशिक रूप से सहमत हो।)

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