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पाताल लोक में रहेगा भद्रा का वास

रक्षाबंधन पर कब तक भद्रा काल ?

रक्षाबंधन पर भद्राकाल 19 अगस्त की रात 02.21 बजे से दोपहर 01.30 बजे तक रहेगा। सुबह 09.51 से 10.53 तक पर भद्रा पुंछ रहेगा। इसके बाद 10.53 से 12.37 तक भद्रा मुख रहेगा। भद्रा काल दोपहर 01.30 बजे  समाप्त हो जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस रक्षाबंधन पर भद्रा काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दरअसल, चंद्रमा के मकर राशि में होने के कारण भद्रा का निवास पाताल लोक में रहेगा। इसलिए धरती पर होने वाले शुभ कार्य बाधित नहीं होंगे। अतः रक्षाबंधन पर किसी भी समय राखी बांधी जा सकती है।

जिस लोक में वास, वहीं प्रभाव

भद्रा जिस लोक में वास करती है, वहीं प्रभावी रहती है। ज्योतिष गणना के अनुसार चंद्रमा जब कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में होता है, तब भद्रा का वास पृथ्वी में होता है। वहीं जब चंद्रमा मेष, वृष, मिथुन और वृश्चिक राशि में रहता है तब भद्रा स्वर्गलोक में रहती है। जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में होता है तो भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है।

भगवान शनि देव की बहन हैं भद्रा

शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन पर भद्रा काल रहने के दौरान राखी बांधना अशुभ होता है। भद्रा के शुरू होने से पहले या फिर भद्रा के खत्म होने के बाद ही राखी बांधी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य और पत्नी छाया की पुत्री व भगवान शनि देव की बहन हैं। भद्रा जन्म से ही बहुत ही चंचल और उग्र स्वभाव की थीं। भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा और मंगल कार्यों में उपद्रव मचाती थीं। साथ ही सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी। एक मान्यता यह भी है कि रावण की बहन ने भद्रा काल में राखी बांधी थी, इस कारण प्रभु राम के हाथों रावण का वध हुआ। (समस्त जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त कर प्रकाशित की गई है)

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