शरद पूर्णिमा की खीर और सेहत का क्या है कनेक्शन
सांस व दमा के रोगियों को खिलाई जाएगी 17 अक्टूबर को औषधि युक्त खीर
बिजनौर। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 17 अक्टूबर को नहटौर क्षेत्रांतर्गत ग्राम नन्हेड़ा में नरेन्द्र वर्मा के आवास पर सांस एवं दमा के मरीजों को निःशुल्क खीर खिलाई जायेगी।

उक्त जानकारी देते हुए आयोजक नरेन्द्र वर्मा ने बताया कि दवाइयों से निर्मित यह खीर शरद पूर्णिमा को चांद की रोशनी में रखकर 17 अक्टूबर की प्रातः अजान के समय (5 बजे) सांस व दमा के मरीजों को खिलाई जायेगी। उन्होंने सांस व दमा के रोगियों को समय पर पहुंचकर लाभ उठाने की अपील की है।
शरद पूर्णिमा की खीर और सेहत का कनेक्शन

धार्मिक दृष्टि से शरद पूर्णिमा के दिन का बहुत महत्व है। यह दिन स्वास्थ्य, धन, संपदा, शुभ कार्य, धार्मिक भावना सहित अन्य रूप से शुभ दिवस होता है। कहा जाता है आश्विन शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस पूर्णिमा के दिन अमृत की वर्षा होती है। इस दिन चंद्रमा हल्के नीले रंग (blue moon) का दिखाई देता है। इस दिन रात को खीर बनाकर चंद्रमा को खीर में रखा जाता है। अगली सुबह उसका सेवन किया जाता है। इसका सेवन करने से कई प्रकार के रोगों से निजात मिलती है या रोगों का असर कम होता है। विद्वानों का कहना है कि इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं का होता है और इससे निकलने वाली किरणें अमृत समान मानी जाती हैं। इसीलिए खीर में चंद्रमा की किरणें पड़ने से यह कई गुना लाभकारी हो जाती है। अत: दूध या खीर को चंद्रमा के प्रकाश में रखकर इसका सेवन किया जाता है। इस संबंध में यह भी माना जाता है कि किसी दिव्य औषधि को खीर में मिलाकर शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में रखने से उसके औषधीय गुण तो कई गुना बढ़ ही जाते हैं, इसके अलावा दूध में भरपूर मात्रा में पाया जाने वाला लैक्टिक एसिड, चांद की किरणों से मिलने वाला अमृत तत्व तथा चावलों में पाए जाने वाला स्टार्च के कारण यह खीर शरीर के लिए काफी फायदेमंद होती है। वहीं चांदी के बर्तन में रोग-प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। अत: यदि खीर को चांदी के बर्तन में भरकर शरद पूर्णिमा की रात बाहर खुले आसमान में रखा जाए तो वो और भी अधिक लाभदायी होती है।
सेहत के लाभ-
1. दमा- दमा के मरीजों को शरद पूर्णिमा की खीर का सेवन जरूर करना चाहिए। इस खीर को चांद की रोशनी में रखकर सुबह 4 बजे इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है। सालभर में शरद पूर्णिमा का दिन दमा रोगियों के लिए अमृत के समान माना जाता है।
2. आंखों की रोशनी – शरद पूर्णिमा के दिन खीर का सेवन तो किया जाता है। साथ ही चांद की रोशनी में 100 बार सुई में धागा पिरोने की परंपरा भी है। कहा जाता है कि ऐसा करने से आंखों की रोशनी तेज होती है। इस दिन खीर का सेवन करने से आंखों से संबंधित परेशानी दूर होती है। चंद्रमा को एकटक देखने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है।
3. स्किन समस्या – शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा घुली हुई खीर खाने से चर्म रोग में आराम मिलता है। स्किन समस्या से जूझ रहे हैं तो इस दूध का सेवन करें। स्किन केयर के साथ त्वचा का ग्लो भी बढ़ता है।
4. दिल की सेहत – हृदय रोगियों के लिए भी इस खीर का सेवन करना फायदेमंद होता है। इस दिन खासकर चांदी के बर्तन में खीर या दूध रखना चाहिए। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और विषाणु भी दूर होते हैं। साथ ही उच्च रक्तचाप में भी आराम मिलता है।
5. मलेरिया – इन दिनों मौसम ठंडा-गरम होने पर मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है, जिससे मलेरिया का खतरा होता है। हालांकि बैक्टीरिया उपयुक्त वातावरण में पनपते हैं। लेकिन बैक्टीरिया जब पित्त के संपर्क में आते हैं तो वह धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलने लगता है। पित्त को नियंत्रित कर के मलेरिया की चपेट में आने से बचा जा सकता है। इसलिए इस खीर को खाने की परंपरा है।
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