विषम संख्या में जलाने चाहिए दीए
शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक
देव दीपावली पर भगवान शिव के लिए जलाएं कितने मुख वाला दीया ?
~ शैली सक्सेना
कार्तिक पूर्णिमा के पर्व पर शाम के समय देव दीपावली मनाई जाती है. देव दीपावली के पावन पर्व पर भगवान शिव के लिए दीए जलाने का विधान है. इस वर्ष यह पावन पर्व शुक्रवार 15 नवंबर को है. शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दीप दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

देव दीपावली पर जलाएं कितने दीए ?
देव दीपावली पर शुभ मुहूर्त में 5, 7, 9, 11, 51, 101 की विषम संख्या में दीए जलाने चाहिए. इससे भी अधिक दीपक जलाने हों तो विषम संख्या का ध्यान रखना चाहिए.
जलाएं कितने मुख का दीपक ?
भगवान भोलेनाथ के लिए 8 या 12 मुख वाला दीपक जलाना शुभ माना जाता है. इससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होंगे और भक्तों के दु:खों को दूर करेंगे. उनके संकट मिटेंगे और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होगा.
दीपदान के नियम: देव दीपावली पर दीप जलाने से पूर्व स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए. फिर भगवान शिव की पूजा करने के बाद दीपदान करना चाहिए.

1. दीपदान के लिए मिट्टी के दीपक का उपयोग करना चाहिए. दीप जलाने से पहले उसे पानी में भीगों दें. जब वो सूख जाए तो दीप जलाएं.
2. देवताओं के लिए गाय के घी का दीपक जलाने की मान्यता है. इससे घर में सुख और समृद्धि बढ़ती है. घी उपलब्ध न तो तिल या सरसों के तेल का भी दीपक जलाया जा सकता है.
3. भगवान शिव के लिए घी वाला 8 या 12 मुखी दीपक जलाना चाहिए. घी वाले दीपक में रुई की बाती का उपयोग करना चाहिए, अन्य दीप तेल से जलाए जा सकते हैं.
4. दीपदान किसी भी पवित्र नदी, मंदिर, पूजा स्थान पर किया जा सकता है.
5. इष्ट देव के लिए 1 मुखी दीपक जलाने का विधान है. यदि भगवान शिव आपके इष्ट देव हैं तो उनके लिए घी वाला 1 मुखी दीपक भी जला सकते हैं.
6. यदि देव दीपावली का दीपक घर के पूजा स्थान पर जलाना है तो उसे ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व कोने, पूर्व, पश्चिम और उत्तर दिशा में जलाएं. पूर्व दिशा में दीप जलाने से आयु वृद्धि, उत्तर में जलाने से धन प्राप्ति और पश्चिम में जलाने से संकटों से मुक्ति मिलती है.
दीप जलाने का मंत्र
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोस्तुते।। दीपो ज्योति परंब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतुमे पापं संध्यादीप नमोस्तुते।।
नोट: संपूर्ण सामग्री विभिन्न स्रोतों एवं ज्योतिषियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित की गई है।
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