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3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को लगेगा तगड़ा झटका

बिजली कंपनियों ने घाटा दिखाया रुपए 13 हजार करोड़

2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग को भेजा प्रस्ताव

UP में 20 प्रतिशत महंगी हो सकती है बिजली

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। दरअसल यूपी में बिजली की दरें 20 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। बिजली कंपनियों ने 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग को प्रस्ताव भेज कर करीब 13 हजार करोड़ रुपए का घाटा दिखाया है। साथ ही 1.16 लाख करोड़ रुपए का एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) प्रस्ताव दाखिल किया है। ऐसे में आयोग बिजली दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकता है।

प्रदेशवासियों को पांच साल बाद महंगी बिजली का तगड़ा झटका लगने वाला है। कंपनियों ने 2025-26 के लिए 16 हजार करोड़ यूनिट बिजली की आवश्यकता बताई है। बिजली खरीद की लागत लगभग 92 हजार से लेकर 95 हजार करोड़ के बीच है। कंपनियों ने साल 2025-26 में 12800 से 13000 करोड़ के घाट का अनुमान जताया है। हालांकि, घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों की ओर से बिजली दर बढ़ाने संबंधी टैरिफ प्रस्ताव आयोग में दाखिल नहीं किया गया है। घाटे की भरपाई आयोग पर छोड़ दिया है। ऐसे में आयोग इस घाटे को पूरा कराने का फैसला लेता है तो बिजली दरों का बढ़ना लगभग तय है। वर्ष 2023-24 का ट्रू-अप और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कंपनियों का 1.16 लाख करोड़ रुपए का एआरआर प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया गया है। प्रस्ताव में आरडीएसएस (रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) के तहत 13.25 प्रतिशत वितरण हानियों का अनुमान लगाते हुए लगभग 1.60 लाख मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता बताई गई है। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव में दक्षिणांचल-पूर्वांचल को अलग नहीं किया गया है। यहां सरकार ने निजीकरण के लिए PPP मॉडल लागू करने का फैसला लिया है। जानकारों का कहना है कि आयोग को ही कंपनियों के घाटे को देखते हुए दरें बढ़ाने पर निर्णय करना होगा। कंपनियों द्वारा बताया जा रहा घाटा यदि सही निकलता है तो उसकी भरपाई के लिए आयोग बिजली की मौजूदा दरों में औसतन 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकता है।

बताया गया है कि कमियां दूर होने के बाद विधिवत उसे स्वीकारने के 120 दिनों के अंदर आयोग को एआरआर प्रस्ताव पर निर्णय करना होगा। चूंकि अगले वित्तीय वर्ष के दौरान विधानसभा का चुनाव नहीं है इसलिए माना जा रहा है कि सरकार को भी इस बार बिजली की दरों में बढ़ोतरी से जनता की नाराजगी का खामियाजा भुगतने का कोई डर नहीं है। ऐसे में आयोग पांच वर्ष बाद बिजली की दरों को बढ़ाने पर 31 मार्च से पहले निर्णय कर सकता है ताकि नई दरें पहली अप्रैल से लागू हो जाएं।

5 साल से नहीं बढ़ी है बिजली दर

यूपी में बिजली दर पिछले 5 साल से नहीं बढ़ी है। बिजली की मौजूदा दरें वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से लागू हैं। आयोग में लगातार प्रस्ताव खारिज होता रहा है। कोविड के दौरान दो साल तक बिजली बिल बढ़ाने पर कोई बात नहीं हुई थी। पिछले साल कॉर्पोरेशन ने ARR में 11 हजार करोड़ का घाटा दिखाया था। कुल लागत लगभग 80000 करोड़ से 85000 करोड़ के बीच में आंकी थी।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा

विरोध में उपभोक्ता परिषद

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि  नियामक आयोग में इसके खिलाफ प्रस्ताव दाखिल किया जाएगा। बिजली कंपनियों को 30 नवंबर तक नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) दाखिल करना होता है। 30 नवंबर को देर रात बिजली कंपनियों ने गुपचुप तरीके से साल 2023-24 का टू अप और साल 2025-26 का ARR नियामक आयोग को सौंप दिया।

कंपनियों के पास है 33 हजार करोड़ रुपए

अवधेश वर्मा ने बताया कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33,122 करोड़ रुपए बकाया है। इस रकम के बदले में उन्हें बिजली दरों में कमी का प्रस्ताव देना चाहिए था, लेकिन बिजली कंपनियां बिजली दरों में इजाफा करवाना चाहती हैं। यही वजह है कि खुद अंतर का जिक्र करके सब कुछ नियामक आयोग पर छोड़ दिया। उन्होंने एआरआर में 42 जिलों वाले दक्षिणांचल व पूर्वांचल डिस्कॉम के निजीकरण संबंधी पीपीपी माडल का जिक्र न किए जाने पर भी सवाल उठाया। वर्मा ने आरोप लगाया कि निजीकरण संबंधी जानकारी आयोग को न देकर बिजली दरों में जबरदस्त बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर बिजली कंपनियां निजी घरानों को फायदा पहुंचाना चाहती हैं। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन की मंशा यदि साफ होती तो उसे एआरआर में बिजली की दर न बढ़ाने के संबंध में लिखना चाहिए था।

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