newsdaily24

update रहें…हर दम, हर पल

जागरूकता के बावजूद हावी है शोषण और कुप्रबंधन

मजदूर के सहारे तरक्की की राह पर आगे बढ़ता है देश

मजदूर किसी भी देश के लिए रीढ़ की हड्डी होते हैं, जिनके मजबूत सहारे पर देश, तरक्की की राह पर आगे बढ़ता है। मजदूर वर्ग स्वस्थ, तंदरुस्त, प्रसन्न और समृद्ध हुए तो देश भी समृद्ध, ऊन्नत, अग्रगामी होगा।

सभी जानते हैं कि मजदूरों का देश और समाज की तरक्की में बहुत महत्व है फिर वह चाहे आर्थिक विकास हो या सामाजिक हो। आज भले ही मशीनरी युग है लेकिन मजदूरों की अहमियत कम नहीं हुई है

…लेकिन चिंता इस बात की है कि जागरूकता के बावजूद, शोषण और कुप्रबंधन की वजह से देश के मजदूर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इसके जिम्मेदार गांव, ब्लॉक और तहसील में बैठे कुछ तथा कथित भ्रष्ट कर्मचारी और अधिकारी हैं। वर्तमान सरकार लगातार मजदूरों की आर्थिक सामाजिक उन्नति के लिए प्रयास कर रही है लेकिन यह भ्रष्ट सरकारी लोग सरकार के मंसूबे पर पानी फेर रहे हैं। आएदिन हम विभिन्न अखबारों मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सुनते पढ़ते हैं कि मनरेगा की मजदूरी नहीं मिली तो कहीं अधिकारियों और ठेकेदार द्वारा उनका हक खा लिया गया। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन आईएलओ की विश्व सामाजिक रिपोर्ट के अनुसार भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2021 में 24.4 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 48.8 प्रतिशत हो गया है। भारत में लगभग एक अरब लोग कामकाजी उम्र के हैं, जिन लोगों को रोजगार के रूप में सरकार द्वारा गिना जाता है उसमें से अधिकांश दिहाड़ी मजदूरी और खेतिहर मजदूरी के रूप में अनिश्चित जीवन जीने पर मजबूर हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार बुनियादी ढांचे के मामले में भारत 141 देश में से 70 में नंबर पर है हालांकि इसके लिए सरकार ने नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन नाम से योजना भी बनाई है। देश की तरक्की के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित होने की जरूरत है। भारतीय संविधान की मुख्य विशेषता एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। संविधान की प्रस्तावना और राज्य की नीति निर्देशक तत्वों से यह जाहिर है कि हमारा लक्ष्य सामाजिक कल्याण है।

भारत में मजदूर 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत से ही अपनी स्थितियों को और बेहतर बनाने के लिए आज 21वी सदी में भी संघर्ष  कर रहा है। उदाहरण के लिए प्रयागराज की मेजा में बंद कताई मिल के हजारों मजदूर  हों फिर वह चाहे मध्य प्रदेश खरगोन सेंचुरी मिल के अपनी बकाया भुगतान के लिए लंबे समय से संघर्ष करते मजदूर हों। मामले और भी हैं, देश में जो आएदिन अपने बकाया ऋण भुगतान के लिए शोषण का शिकार होते हैं।
हम सब को पता है कि भारत पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ती पांचवी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे भी बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगा लेकिन आज भी अमेरिका के मजदूर कमाई के मामले में भारत से बहुत आगे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की रही है क्योंकि यह श्रम कानून के अंतर्गत नहीं आते, लेकिन देश की मोदी और योगी सरकार ने और असंगठित क्षेत्र फिर वह चाहे मनरेगा मजदूर हों या मछुआरे हों, सभी के लिए स्वास्थ्य और पेंशन  बीमा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए विभिन्न योजनाएं चालू की हैं। इसके अलावा उनके प्रशिक्षण, सर्टिफिकेशन, लघु ऋण आदि कई योजनाएं चलाई हैं। जागरूक करने के लिए सरकार अधिकारियों से बार-बार अपील करती है। गांव में चौपाल और विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन संबंधित जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी नहीं चाहते कि गांव देहात में लोग जागरुक हों। इसके अलावा कई बार देखा गया है, मजदूर वर्ग, प्रमाद व आलस्य में पड़ कर सरकारी सुविधाओं व सहायता के बीच फंस जाते हैं और मेहनत से जी चुराने लगते हैं। जिसका नुकसान पूरे समाज को पिछड़ेपन के रूप में उठाना पड़ता है। इधर चुनाव जीतने के चक्कर में बहुत से राजनीतिक दल फ्रीबीज् घोषित कर और ज्यादा आलसी बनने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
यह भी सही है कि, मोदी सरकार लोगों में स्वावलंबन और स्वाभिमान भरने की कोशिश खूब कर रही है, बड़ेे पैमाने रोजगार व्यापार हेतु कोलैटरल फ्री ऋण दिये जा रहे ताकि लोग अपना रोजगार शुरू करें और केवल नौकरी के भरोसे न रहें, आशा है आनेवाले सालों में भारत में मजदूर वर्ग बेहतर स्थितियों में हो। जिस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार रिकॉर्ड बनाते दुनिया की पांचवें स्थान पर पहुंच गई है और
तीसरे स्थान को हासिल करने जा रही, निश्चित रूप से हर वर्ग उन्नति करेगा।

लेखक ~ अंकित तिवारी (स्वतंत्र पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता प्रयागराज यूपी)

Posted in , , ,

Leave a comment