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शूटिंग में जीता एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक

कजाकिस्तान में अंश डवास ने रचा इतिहास

बिजनौर। विकास खण्ड नूरपुर के ग्राम शादीपुर मिलक के रहने वाले संजीव डबास के पुत्र अंश डवास ने कजाकिस्तान के शिमकेंट शहर में आयोजित एशियन चैंपियनशिप के 10 मीटर एयर राइफल वर्ग के टीम इवेंट में स्वर्ण व व्यक्तिगत इवेंट में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। अंश डबास की सफलता का समाचार मिलते ही जनपद के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई और बधाई देने वालों का तांता लग गया है। अभी तक इससे पहले जनपद का कोई भी शूटर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल नहीं जीत पाया था। अंश ने एक नहीं बल्कि एक साथ दो मेडल जीतकर कर इतिहास रच दिया।

अंश ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता संजीव डवास, कोच आकाश कुमार व परिवार को दिया है। अंश के पिता जी ने बताया कि इस सफलता के लिए भारत व प्रदेश सरकार की खेल प्रोत्साहन की नीति का बहुत बड़ा योगदान है।
भारतीय रेडक्रास सोसायटी बिजनौर के चेयरमैन टीकम सिंह सेंगर, डा. सुबोध चन्द्र शर्मा निदेशक, विवेकानन्द दिव्य भारती के अध्यक्ष योगेन्द्र पाल सिंह योगी, जिला व्यायाम शिक्षक अरविन्द अहलावत, खेल परिवार यूट्यूब चैनल के विनय तितोरिया ने उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी है। कोच आकाश कुमार ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि अंश निश्चित रूप से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेगा। अंश अब तक स्कूल गेम, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में 100 के लगभग पदक ट्राफी जीत चुका है।

अंश डबास की कामयाबी का सफर

अंश डबास का शूटिंग का सफर आरआर पब्लिक स्कूल व किसान शूटिंग रेंज से शुरू हुआ, जहां प्रबंधक मनुजेन्द्र व प्रधानाचार्य प्रमन्यु गुप्ता, उपप्रधानाचार्य टीकम सिंह के प्रोत्साहन और कोच आकाश कुमार के प्रशिक्षण में अंश लगातार जिला, मण्डल, प्रान्त व राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन करते रहे। उसके बाद अलवर राजस्थान में कोच परवेन्द्र सिंह व कर्णी सिंह नेशनल शूटिंग एकेडमी दिल्ली में कोच दीक्षान्त की देखरेख में लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाता है, सीखा। उनके सफल होने पर जिला राइफल ऐसोसिएशन के खान ज़फ़र सुल्तान, ताजपुर के एमपी सिंह आदि का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अंश के पिता विवेकानन्द दिव्य भारती के नूरपुर विकास खण्ड अध्यक्ष व आरआर पब्लिक स्कूल में फिजिकल के अध्यापक हैं। एक मध्य वर्गीय आय वाले संजीव डवास ने अपना तन मन धन अंश की कामयाबी में लगा कर हर सुविधा देने का प्रयास किया, ऐसा समर्पण बहुत कम देखने को मिलता है।

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