परिवार और देश के विकास में भी बहुत बड़ा योगदान
हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं महिलाएं
बिजनौर। समाज में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान और उनकी उपलब्धियों को याद करने का दिन, 26 अगस्त को मनाया जाने वाला महिला समानता दिवस है। इस अवसर पर, पत्रकार भूपेन्द्र कुमार ने महिलाओं को हर क्षेत्र में मिल रही सफलता और उनके बढ़ते सम्मान पर प्रकाश डाला है।

उनका कहना है कि आज महिलाएं चिकित्सा, शिक्षा, और तकनीक जैसे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ बराबरी से काम कर रही हैं। हमारे देश में सदियों से महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहा है और उन्हें देवी के रूप में पूजा जाता है। यह दु:खद है कि कुछ जगहों पर उनके साथ हीन भावना का व्यवहार भी किया जाता है, जबकि परिवार और देश के विकास में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का भी बहुत बड़ा योगदान है।
अनेक वीरांगनाओं की गौरवशाली गाथा
भारत के इतिहास में कई ऐसी वीरांगनाएं हुई हैं, जिन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने युद्ध कौशल से अंग्रेजों को परास्त किया। अंतरिक्ष के क्षेत्र में कल्पना चावला ने अपना अहम योगदान दिया। इसके अलावा, भारत की प्रथम नागरिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का पदभार संभालना देश के लिए एक गौरव का क्षण है।
महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले का नाम भी शिक्षा के क्षेत्र में आदर के साथ लिया जाता है। वहीं, माता सीता ने त्याग और तपस्या की अनूठी मिसाल पेश की, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।
हर भूमिका में सम्मान की पात्र हैं महिलाएं
कुल मिलाकर महिलाएं मां, पत्नी और बेटी के रूप में हर भूमिका में सम्मान की पात्र हैं और हमें उनका हमेशा सम्मान करना चाहिए। महिलाएं जीवन में कई संघर्षों का सामना करती हैं, लेकिन फिर भी बिना किसी शिकायत के अपने कर्तव्यों का पालन पूरी लगन के साथ करती हैं। इसलिए महिला समानता दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके योगदान को स्वीकार करने की एक निरंतर प्रक्रिया है।

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