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महाराजगंज में पिता के अंतिम संस्कार के लिए भटकते रहे अनाथ बच्चे

मुस्लिम भाइयों ने पेश की मानवता की मिसाल

समाज और सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े करती घटना

~भूपेंद्र निरंकारी

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवा में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ दो अनाथ बच्चों को अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए दो दिनों तक भटकना पड़ा।
नौतनवा के राजेंद्र नगर निवासी लव कुमार पटवा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। छह महीने पहले ही उनकी पत्नी की भी मृत्यु हो चुकी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण, उनके 14 वर्षीय बेटे राजवीर, 10 वर्षीय बेटे देवराज, और उनकी बहन पूरी तरह से अनाथ हो गए।

पत्रकार भूपेंद्र निरंकारी

रिश्तेदारों और मदद की कमी

परिवार का कोई भी रिश्तेदार या सरकारी संस्था उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। निराशा में, बच्चों ने अपने पिता की लाश को एक ठेले पर रखा और दो दिनों तक अंतिम संस्कार के लिए जगह और मदद की तलाश में भटकते रहे। वे कभी शमशान घाट तो कभी कब्रिस्तान गए, लेकिन पैसों की कमी के कारण अंतिम संस्कार नहीं कर पाए।

मुस्लिम भाइयों ने की मदद

जब हर तरफ से उम्मीद खत्म हो गई, तब दो मुस्लिम भाइयों राशिद कुरैशी एवं वारिस कुरैशी ने इन बच्चों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने न सिर्फ बच्चों को सहारा दिया, बल्कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनके पिता का अंतिम संस्कार भी करवाया। इस घटना ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की है।

सवाल खड़े करती यह घटना

यह घटना समाज और सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। लेखक भूपेंद्र निरंकारी ने इस घटना पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों, समाजसेवियों और जिम्मेदार लोगों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि “किसी की मदद करके सेल्फी लेने वाले लोग कहाँ चले गए?” उन्होंने समाज के सभी जागरूक लोगों और समाजसेवी संस्थाओं से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे आने का आग्रह किया, ताकि भविष्य में इस तरह की हृदय विदारक घटनाएँ दोबारा न हों।

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