newsdaily24

update रहें…हर दम, हर पल

“पथरी” और “किडनी स्टोन” में नहीं कोई खास अंतर

kidney stones: खान-पान में कुछ विशेष सावधानियां ज़रूरी

~ शैली सक्सेना

पथरी (kidney stones) होने पर खान-पान में कुछ विशेष सावधानियां बरतना बहुत ज़रूरी है, ताकि पथरी का आकार न बढ़े और नई पथरी बनने का खतरा कम हो जाए।
जानिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां :

1. खूब पिएं पानी

~ क्या करें: दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास (लगभग 2 से 3 लीटर) पानी पिएं। पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है और यूरिन को पतला बनाता है, जिससे पथरी बनाने वाले मिनरल्स शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

~ क्या न करें: पानी कम पीने से बचें, खासकर गर्म मौसम में या ज़्यादा शारीरिक गतिविधि के बाद।

2. कम करें नमक (सोडियम)

~ क्या करें: अपने खाने में नमक की मात्रा कम करें। ज़्यादा नमक यूरिन में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देता है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।

~ क्या न करें: डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड फूड, पैकेट वाले स्नैक्स, अचार और पापड़ खाने से बचें, क्योंकि इनमें सोडियम ज़्यादा होता है।

3. कैल्शियम की सही मात्रा

~ क्या करें: कैल्शियम युक्त भोजन जैसे दूध, दही और पनीर का सेवन करें, लेकिन नियंत्रित मात्रा में। अचानक कैल्शियम लेना बंद न करें, क्योंकि यह शरीर के लिए ज़रूरी है और ऑक्सालेट को बांधने में मदद करता है।

~ क्या न करें: कैल्शियम सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

4. ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों से बचें

~ क्या करें: ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें जिनमें ऑक्सालेट की मात्रा ज़्यादा होती है, खासकर अगर आपकी पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट की है।

~ क्या न करें: पालक, टमाटर के बीज, बैंगन, चुकंदर, चॉकलेट, चाय, कॉफी और नट्स (बादाम, काजू) का ज़्यादा सेवन न करें। अगर आप इन्हें खाते भी हैं, तो साथ में पानी खूब पिएं।

5. प्रोटीन पर दें ध्यान

~ क्या करें: प्रोटीन को संतुलित मात्रा में लें।

~ क्या न करें: ज़्यादा मांसाहारी भोजन जैसे रेड मीट, चिकन, और मछली से बचें, क्योंकि ये यूरिन की एसिडिटी बढ़ाते हैं और पथरी बनने में मदद कर सकते हैं।

6. विटामिन-C और यूरिक एसिड

~ क्या करें: विटामिन-C वाले खट्टे फल जैसे नींबू और संतरा का सेवन करें, क्योंकि ये यूरिन को अल्कलाइन बनाते हैं।

~ क्या न करें: ज़्यादा विटामिन-C सप्लीमेंट्स लेने से बचें, क्योंकि यह कुछ मामलों में पथरी के खतरे को बढ़ा सकता है।

यूरिक एसिड पथरी: अगर आपकी पथरी यूरिक एसिड की है, तो दाल, राजमा, छोले, और मांसाहारी भोजन का सेवन कम करें।

कुछ अतिरिक्त सुझाव
~ डॉक्टर से सलाह: किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से ज़रूर सलाह लें।
~ दवाईयों का ध्यान: अगर आप कोई दवाई ले रहे हैं, तो उसके बारे में डॉक्टर को बताएं, क्योंकि कुछ दवाएं भी पथरी का कारण बन सकती हैं।

क्या आप अपनी पथरी के प्रकार (जैसे कैल्शियम, यूरिक एसिड आदि) के बारे में जानते हैं?

अगर आपको पता है कि आपकी पथरी किस प्रकार की है, तो खान-पान में और भी सटीक बदलाव किए जा सकते हैं।

पथरी के प्रकार

1. कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी: यह सबसे आम प्रकार की पथरी है।
2. कैल्शियम फॉस्फेट पथरी: यह भी एक तरह की कैल्शियम पथरी है।
3. यूरिक एसिड पथरी: यह तब बनती है जब यूरिन में यूरिक एसिड की मात्रा ज़्यादा होती है।
4. सिस्टीन पथरी: यह एक आनुवंशिक स्थिति (genetic condition) के कारण बनती है।

क्या होता है ऑक्सालेट (Oxalate)

ऑक्सालेट (Oxalate) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला केमिकल कंपाउंड है। यह पौधों, जानवरों और मनुष्यों में मौजूद होता है। जब हम ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं, तो हमारा शरीर उसे पचाता है और बचा हुआ ऑक्सालेट यूरिन (पेशाब) के रास्ते बाहर निकाल देता है।
पथरी से संबंध
ऑक्सालेट का संबंध पथरी से सबसे ज़्यादा है क्योंकि, पथरी के 80% मामले कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी के होते हैं।
1. कैसे बनती है पथरी: जब शरीर में ऑक्सालेट की मात्रा बहुत ज़्यादा हो जाती है और पेशाब कम बनता है, तो ऑक्सालेट यूरिन में मौजूद कैल्शियम से जुड़कर क्रिस्टल बना लेता है।
2. क्रिस्टल से पथरी: ये छोटे-छोटे क्रिस्टल एक साथ मिलकर धीरे-धीरे एक बड़ा और कठोर पत्थर जैसा पदार्थ बना लेते हैं, जिसे हम पथरी कहते हैं।

कहाँ पाया जाता है ऑक्सालेट ?

कुछ खाद्य पदार्थों में ऑक्सालेट की मात्रा बहुत अधिक होती है। पथरी के मरीजों को इन चीजों का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।

उच्च ऑक्सालेट वाले खाद्य पदार्थ:
1. हरी सब्जियाँ: पालक, चुकंदर, बैंगन
2. फल: रसभरी, स्ट्रॉबेरी, कीवी
3. मेवे (Nuts): बादाम, काजू, मूंगफली
4. अन्य: चॉकलेट, कोको, सोया उत्पाद, शकरकंद, चाय और कॉफी

खान-पान में बरतें क्या सावधानी 

अगर आपको कैल्शियम ऑक्सालेट की पथरी है या पहले हो चुकी है, तो आपको ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों के साथ कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए:
~ पानी ज़्यादा पिएं: पर्याप्त पानी पीने से यूरिन पतला रहता है और ऑक्सालेट बाहर निकल जाता है।
~ कैल्शियम लें, पर संतुलित मात्रा में: खाने के साथ कैल्शियम लेने से ऑक्सालेट पेट में ही कैल्शियम से जुड़ जाता है और पेशाब में जाने से पहले ही मल के रास्ते बाहर निकल जाता है। दूध, दही, और पनीर का सेवन करें, लेकिन सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
~ उच्च ऑक्सालेट खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें: अगर आप ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थ खाते हैं, तो उनकी मात्रा कम रखें। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ऑक्सालेट केवल एक कारक है। पथरी के लिए कई अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं, जैसे पानी कम पीना और आनुवंशिक कारण। इसलिए, किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है।

“पथरी” (स्टोन) और “किडनी स्टोन” (गुर्दे की पथरी) में अंतर

“पथरी” (स्टोन) और “किडनी स्टोन” (गुर्दे की पथरी) में कोई खास अंतर नहीं है। वास्तव में, “किडनी स्टोन” एक प्रकार की पथरी है। “पथरी” एक सामान्य शब्द है जो शरीर के किसी भी अंग में बनने वाले कठोर, कंकड़ जैसे जमाव के लिए इस्तेमाल होता है, जैसे:
* गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन): यह सबसे आम प्रकार की पथरी है। यह गुर्दे में बनती है और मूत्र प्रणाली (मूत्रवाहिनी, मूत्राशय) से होकर गुजरती है।
* पित्ताशय की पथरी (गॉलब्लैडर स्टोन): यह पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में बनती है। यह कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन से बनी होती है।
* मूत्राशय की पथरी (ब्लेडर स्टोन): यह मूत्राशय में बनती है।

गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) के बारे में जानकारी:
गुर्दे की पथरी को “रेनल लिथियासिस” या “नेफ्रोलिथियासिस” भी कहा जाता है। ये खनिज और नमक के जमाव से बनती हैं।
कैसे बनती है गुर्दे की पथरी :
1. कैल्शियम स्टोन (Calcium Stones): यह सबसे आम प्रकार की पथरी है। यह कैल्शियम ऑक्सालेट या कैल्शियम फॉस्फेट से बनी होती है।
2. यूरिक एसिड स्टोन (Uric Acid Stones): यह उन लोगों में बनती है जिनका मूत्र बहुत अम्लीय होता है, खासकर जो अधिक मात्रा में पशु प्रोटीन (मांस, मछली आदि) का सेवन करते हैं।
3. स्ट्रुवाइट स्टोन (Struvite Stones): यह मूत्र पथ के संक्रमण (Urinary Tract Infection) के कारण बनती है।
4. सिस्टीन स्टोन (Cystine Stones): यह एक दुर्लभ प्रकार की पथरी है जो सिस्टीनुरिया नामक वंशानुगत स्थिति के कारण बनती है।

लक्षण:

जब तक पथरी छोटी होती है, तब तक इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जब यह मूत्रवाहिनी (ureter) में अटक जाती है, तो ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
* पीठ, पेट के निचले हिस्से या बाजू में तेज दर्द।
* पेशाब में खून आना।
* पेशाब करते समय जलन या दर्द होना।
* बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना।
* बुखार और ठंड लगना।
* मतली और उल्टी।
* बदबूदार या मटमैला पेशाब।

क्या है इलाज:

इलाज पथरी के आकार, प्रकार और स्थान पर निर्भर करता है।
1. छोटे स्टोन: अधिक पानी पीकर और दर्द निवारक दवाओं की मदद से ये स्टोन प्राकृतिक रूप से बाहर निकल जाते हैं।
2. बड़े स्टोन:
~ शॉकवेव लिथोट्रिप्सी (SWL): इसमें शॉकवेव की मदद से स्टोन को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है।
~ युरेटेरोस्कोपी (Ureteroscopy): इसमें एक पतली ट्यूब डालकर स्टोन को निकाला या लेजर से तोड़ा जाता है।
~ परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PCNL): यह बड़े स्टोन के लिए एक सर्जिकल प्रक्रिया है।
~ ओपन सर्जरी: यह बहुत ही दुर्लभ मामलों में की जाती है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त कर प्रस्तुत की गई है। योग्य चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।)

Posted in , , ,

Leave a comment