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देशभर में मनाई जा रही पितृ अमावस्या

प्रमुख तीर्थों में भीड़: काशी, प्रयाग और गया में जुटे लाखों श्रद्धालु

सर्व पितृ अमावस्या: जब धरती से विदा किए जाते हैं पितर

लखनऊ: आज देशभर में पितृ अमावस्या मनाई जा रही है। इस दिन को सर्व पितृ अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन पितृ पक्ष के 15 दिनों के अनुष्ठानों के समापन का प्रतीक है। इस विशेष अवसर पर, हिंदू धर्म के लोग अपने दिवंगत पूर्वजों, पितरों और परिवार के सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत में पितर धरती पर आते हैं और पितृ अमावस्या पर विदा होते हैं।

पितृ पक्ष की शुरुआत: पितृ पक्ष के पहले दिन, यानी प्रतिपदा को, यमलोक से पितर धरती पर आते हैं और 15 दिनों तक अपने वंशजों के साथ रहते हैं। इस दौरान, वे श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से अपने हिस्से का भोजन और जल ग्रहण करते हैं।
पितृ अमावस्या: पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन, पितरों को श्राद्ध और तर्पण करके विधिवत विदाई दी जाती है ताकि वे वापस अपने लोक जा सकें। यह दिन पितरों को शांत करने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

पितरों के लिए किया जा रहा विशेष अनुष्ठान

पितृ अमावस्या एक ऐसा दिन है जब हम अपने पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह दिन हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमें हमारे पूर्वजों के बलिदानों और योगदानों को याद रखने की प्रेरणा देता है। आज का दिन उन सभी पितरों के लिए समर्पित है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश नहीं हो सका। इस दिन, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं ताकि पूर्वजों की आत्मा को शांति मिल सके और उन्हें मोक्ष प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ अमावस्या पर किए गए श्राद्ध से पितृ दोष समाप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उमड़ी भीड़

देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों और नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है।
~ प्रयागराज: संगम तट पर लाखों श्रद्धालु सुबह से ही स्नान और तर्पण करने के लिए एकत्रित हो रहे हैं।
~ काशी (वाराणसी): गंगा के घाटों पर पिंडदान और श्राद्ध के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे हैं।
~ गया: पितृ अमावस्या पर पिंडदान के लिए गयाजी को विशेष महत्व दिया जाता है, और वहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

पितृ अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, यह माना जाता है कि पितृ अमावस्या पर किया गया श्राद्ध और दान बहुत फलदायी होता है। इस दिन, लोग अपने पूर्वजों के लिए भोजन तैयार करते हैं और ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और गरीबों को दान करते हैं। इसके अलावा, गाय, कुत्ते और कौवों को भी भोजन खिलाया जाता है, जिन्हें पितरों का प्रतीक माना जाता है।
यह दिन हमें हमारे पूर्वजों के योगदानों और बलिदानों को याद दिलाता है और हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखता है।

पूर्वजों का सम्मान और उनके प्रति श्रद्धा

धार्मिक नेताओं ने इस अवसर पर लोगों से अपने पूर्वजों का सम्मान करने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पितृ अमावस्या पर किया गया दान और श्राद्ध बहुत फलदायी होता है।
यह पितृ अमावस्या का दिन हमें हमारे पूर्वजों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद दिलाता है और हमें उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर देता है। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि हमें अपने परिवार और समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए।

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