newsdaily24

update रहें…हर दम, हर पल

बिजनौर के बेगमपुर चायमल गौशाला में गायों की दुर्दशा

प्रबंधक, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी पर लापरवाही के आरोप

गौशाला में भूख से तड़पकर मर रहीं गौमाता

नगीना (उत्तर प्रदेश)। जिला बिजनौर के ब्लॉक कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत गांव बेगमपुर चायमल उर्फ धिमाहेड़ी में स्थित गौशाला में गायों की हालत दयनीय है। खबरों के अनुसार, गौशाला में कई गायें भूख और बीमारी से तड़प-तड़पकर अपनी जान गंवा रही हैं। आरोप है कि गौशाला के प्रबंधक, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में चार गौवंश अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

प्रशासन की लापरवाही और प्रबंधन पर गंभीर आरोप

गौशाला की देखभाल करने वाले केयरटेकर अमर सिंह और मजदूर माया देवी ने बताया कि वे नियमित रूप से गायों के बीमार होने या मरने की सूचना प्रबंधक, ग्राम प्रधान चरन सिंह और ग्राम पंचायत अधिकारी दिनेश प्रजापति को देते रहते हैं। हालाँकि, उनकी सूचना पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। केयरटेकर का कहना है कि ग्राम प्रधान, जो खुद को गौ-सेवक कहते हैं, गौशाला का निरीक्षण करने तक नहीं आते क्योंकि उनका घर कई किलोमीटर दूर है।

प्रतीकात्मक चित्र

सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग और लाखों का घोटाला

जानकारी के मुताबिक, गौशाला में रहने वाली गायों को सिर्फ सूखा भूसा दिया जाता है, जो उनकी एक दिन की खुराक के लिए भी पर्याप्त नहीं है। इसके बावजूद, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी पर हर महीने लाखों रुपये कमाने का आरोप है। यह भी बताया गया है कि गौशाला की लगभग 50 बीघा भूमि पर चारा उगाकर उसे बेचा जाता है और उससे मोटी रकम कमाई जाती है। गौशाला के रखरखाव और गायों के चारे के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे बेसहारा गौवंश को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है।

हिंदू सुरक्षा सेवा संघ ने उठाया मुद्दा

इस गंभीर मामले को हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उठाया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष गुरजीत सिंह, जिला महामंत्री टिंकू विश्वकर्मा, जिला मंत्री मनोज चौहान, राकेश, नगर अध्यक्ष भूपेंद्र, यशवीर, योगराज, हरविंदर, विजय, कावेद्र, दीपचंद, सोनू, देवेंद्र, और रोहित सहित कई सदस्यों ने इस घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गौशाला के जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि निरीह पशुओं की जान बचाई जा सके।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

Posted in , ,

Leave a comment