70 की उम्र में भी जोश 19 साल का …
पहलवान से साहित्यकार तक और समाजसेवा के धनी
भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं नजीबाबाद के जितेंद्र सिंह कक्कड़
रिपोर्ट: भूपेंद्र निरंकारी, बिजनौर
बिजनौर: आज हम एक ऐसे अद्भुत व्यक्तित्व की बात कर रहे हैं, जिनकी नि:स्वार्थ सामाजिक सेवा की भावना युवाओं से कहीं कम नहीं है। लगभग 70 वर्ष की आयु में भी निरंतर सक्रिय रहने वाले श्री जितेंद्र सिंह कक्कड़ एक मिलनसार, मित्रता के धनी और असाधारण व्यवहार कुशलता वाले व्यक्ति हैं। उनके जीवन की उपलब्धियाँ कई क्षेत्रों तक फैली हुई हैं, जो उन्हें नजीबाबाद शहर ही नहीं बल्कि कल्पना से भी परे एक बहुमूल्य विरासत बनाती हैं।

खेल के मैदान से सक्रियता का आरंभ
जितेंद्र सिंह कक्कड़ का शुरुआती जीवन ही सक्रियता से भरा रहा। बचपन में खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ ही, उन्होंने 1970 के दशक में मल्ल युद्ध (कुश्ती) के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया था। उनकी प्रतिभा को देखते हुए, दिल्ली के अखाड़े के गुरु हनुमान ने उन्हें दिल्ली बुलाने के लिए संदेश भेजा था, यह कहते हुए कि यह लड़का अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बन सकता है। हालांकि, भाग्य की रेखा ने उन्हें अन्य क्षेत्रों में खींच लिया।
गुरुद्वारा प्रबंधन और वरिष्ठ नागरिक कल्याण में नेतृत्व
खेल से सामाजिक सक्रियता की ओर मुड़ते हुए, श्री कक्कड़ ने प्रशासनिक और सामुदायिक सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं:
पर्यावरण प्रेम और जीव दया: वह पर्यावरण के प्रति अत्यधिक सजग हैं। विभिन्न स्कूलों में पौधे रोपण करवाते हैं और अपने घर के बाहर बड़े बर्तनों में पानी और बचे हुए भोजन को पक्षियों और आम जानवरों के लिए रखते हैं, जो उनकी जीवों के प्रति दया भावना को दर्शाता है।
वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में, श्री कक्कड़ की योजना है कि वह साहित्य, संगीत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता जैसे और भी कई नए अध्याय समाज के हित में जोड़ेंगे।

गुरुद्वारा प्रबंधन: 1988-89 में वह गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी, नजीबाबाद के कोषाध्यक्ष रहे और बाद में 2019-20 में महामंत्री के पद पर भी अपनी सेवाएँ दीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जिला स्तर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, बिजनौर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी योगदान दिया।
वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति: 2014 से ही वह वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति, नजीबाबाद के महामंत्री के रूप में सेवा करते रहे, और 2025 में वह अध्यक्ष के पद को सुशोभित कर रहे हैं।
इस समिति के माध्यम से उन्होंने पुरानी और नई पीढ़ी को जोड़ने, मेडिकल/आँखों के कैंपों का आयोजन करने और वट वृक्ष स्मारिका (वरिष्ठ नागरिकों के सहयोग से) छपवाने जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

साहित्य, संगीत और पर्यावरण की त्रिवेणी
श्री जितेंद्र सिंह कक्कड़ सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं:
काव्य गोष्ठियों का आयोजन: वह युगांतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के अध्यक्ष के रूप में समय-समय पर काव्य गोष्ठियों का आयोजन करते हैं। वह अपनी माता जी के नाम से माता दर्शन कौर स्मृति सम्मान द्वारा समाजसेवियों, साहित्यकारों और सक्रिय बुजुर्गों को सम्मानित करते हैं।
साहित्यिक योगदान: पिछले 12 वर्षों से वह साहित्य के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी सामाजिक, पारिवारिक और देश के प्रति रचनाओं को समय-समय पर सोशल मीडिया और साहित्यिक समूहों में सम्मान मिलता रहा है, जिसमें उन्हें कई बार “बेस्ट पोस्ट ऑफ दी डे” का सम्मान प्राप्त हुआ है।
संगीत और गायन: वह एक संगीत प्रेमी और गायक भी हैं। एक ऐप पर उनके गाए हुए लगभग 1500 गाने उपलब्ध हैं।
निस्वार्थ सेवा: उनकी निस्वार्थ सेवा भावना इतनी गहरी है कि यदि कहीं ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाए, तो वह स्वयं खड़े होकर जाम खुलवाने लगते हैं। उनकी इस भावना से प्रभावित होकर एक अधिकारी ने उन्हें SPO बनने का सुझाव भी दिया था।

- जितेंद्र सिंह कक्कड़ जी वास्तव में नजीबाबाद की एक अनमोल धरोहर हैं, जिनकी कार्यक्षमता और समाज के प्रति निष्ठा इस उम्र में भी काबिले तारीफ है। रिपोर्टर भूपेंद्र कुमार ने बातचीत के बाद गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी शख्सियत से इंटरव्यू करना और उनके विचारों को पाठकों तक पहुँचाना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
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