1930 पर दर्ज कराएं शिकायत
फर्जी CBI/ED अधिकारी गैंग का सदस्य लखनऊ से गिरफ्तार
₹1.18 करोड़ का ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड
लखनऊ। राजधानी में एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जहां फर्जी सीबीआई और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) अधिकारी बनकर एक व्यक्ति से कुल ₹1 करोड़ 18 लाख 55 हज़ार रुपए ठग लिए गए। साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए गैंग के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है।
क्या है मामला?
पिछले महीने, हीरक भट्टाचार्य नामक पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित को पहले ‘विजय खन्ना’ नामक कथित पुलिस अधिकारी का व्हाट्सएप कॉल आया, जिसने बताया कि उनके नाम से दिल्ली के केनरा बैंक में एक फर्जी खाता खोला गया है और उसमें धोखाधड़ी का पैसा जमा हुआ है।इसके तुरंत बाद, कॉल करने वाले ने स्वयं को ईडी अधिकारी ‘राहुल गुप्ता’ बताकर जांच के नाम पर पीड़ित पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। जांच को गोपनीय बताते हुए किसी से संपर्क न करने की चेतावनी दी गई और डरा-धमकाकर विभिन्न बैंक खातों में ₹1,18,55,000 जमा करवा लिए गए। साइबर अपराधियों ने पीड़ित को फर्जी गिरफ्तारी वारंट और कोर्ट के सीजर आदेश भी भेजे और लगातार व्हाट्सएप कॉल व चैट के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ (डिजिटल रूप से बंधक) करके पैसे हड़प लिए।

गिरफ्तारी और आरोपी का खुलासा
एक महीने की गहन जांच के बाद, साइबर क्राइम पुलिस ने लखनऊ के ग्राम सैफलपुर, काकोरी मलिहाबाद निवासी 39 वर्षीय कमलेश कुमार को गिरफ्तार किया। कमलेश के पास से एक रियल मी मोबाइल फोन भी बरामद हुआ।
पूछताछ में कमलेश ने बताया कि वह मिठाई सप्लाई का काम करता है। अगस्त में उसकी मुलाकात सीतापुर निवासी अनुराग से हुई थी। अनुराग ने उसे कमीशन का लालच दिया। कमलेश ने अनुराग के कहने पर गोमतीनगर के इंडसइंड बैंक में अपना खाता खुलवाया और खाते से संबंधित सभी दस्तावेज व सिम अनुराग को दे दिए। उसे कुल लेन-देन पर 2% कमीशन मिलना था।
विदेशी कनेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग:
अभियुक्त ने खुलासा किया कि उसका साथी अनुराग विदेश में बैठकर फ्रॉडस्टरों से जुड़ा हुआ है और वह संपूर्ण ट्रांजैक्शन का 5% USDT (क्रिप्टोकरेंसी) के रूप में प्राप्त करता था। यह गैंग ठगी के पैसे सीधे विदेशी खातों में ट्रांसफर करता है। कमलेश ने यह भी बताया कि सितंबर 2025 में उसे उत्तराखंड पुलिस भी इसी तरह के करोड़ों रुपए की ठगी के मामले में जेल भेज चुकी है, और उसके खातों पर पूरे भारत से लगभग 22 शिकायतें दर्ज थीं।
साइबर क्राइम पुलिस की चेतावनी:
साइबर क्राइम प्रभारी ने बताया कि अपराधी अक्सर खुद को पुलिस, ईडी या सीबीआई अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं, फर्जी पुलिस स्टेशन या जांच कक्ष का सेटअप दिखाकर वीडियो कॉल करते हैं और डिजिटल हाउस अरेस्ट में रखते हैं।
1930 का लें सहारा
साइबर क्राइम पुलिस ने जनता को आगाह किया है कि: भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। ऐसी किसी भी कॉल से डरने की जरूरत नहीं है। साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
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