भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है, जिसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।
भाई दूज (यम द्वितीया): भाई-बहन के प्रेम का अनमोल पर्व
भाई दूज की कथा और पूजन का तरीका
1. भाई दूज की पौराणिक कथा (यम और यमुना की कहानी): यह पर्व यमराज (मृत्यु के देवता) और उनकी बहन यमुना (पवित्र नदी) के प्रेम से जुड़ा है।
भाई का निमंत्रण: पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव की पत्नी छाया के पुत्र यमराज और पुत्री यमुना थे। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्रेम करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर आकर भोजन करने के लिए निमंत्रण भेजती थीं। यमराज अपने कार्य में व्यस्तता के कारण इस निमंत्रण को टालते रहे।

घर आगमन: एक बार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमराज अचानक अपनी बहन यमुना के घर आ पहुँचे। अपने भाई को घर पर देखकर यमुना बहुत प्रसन्न हुईं।
स्नेहपूर्वक सत्कार: यमुना ने बड़े आदर और प्रेम से भाई का स्वागत किया। उन्होंने विधि-विधान से भाई को तिलक लगाया, आरती उतारी और उन्हें स्वादिष्ट व्यंजनों का भोजन कराया।
यमराज का वरदान: बहन के प्रेम और सत्कार से यमराज अत्यंत प्रसन्न हुए। विदा लेते समय उन्होंने यमुना से वरदान माँगने को कहा। यमुना ने वरदान माँगा कि: आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे घर अवश्य आएं। इस दिन जो बहन अपने भाई को तिलक करे, उसके भाई को अकाल मृत्यु का भय न हो और वह दीर्घायु प्राप्त करे।
पर्व की शुरुआत: यमराज ने यमुना को यह वरदान दिया और तभी से यह पावन पर्व भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा।
2. भाई दूज पूजन का तरीका (तिलक विधि): इस दिन बहनें, भाई की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना के साथ उन्हें तिलक लगाती हैं।
पूजन सामग्री
पूजा की थाली
रोली (कुमकुम) और अक्षत (चावल)
नारियल (या गोला)
पान और सुपारी
मिठाई (या पकवान)
फूल और फूलमाला
कलावा (रक्षा सूत्र)
दीपक (आरती के लिए)पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप) पवित्रता और तैयारी:
बहनें सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
भाई के लिए अपने हाथों से स्वादिष्ट भोजन या पकवान तैयार करें।
पूजा के स्थान पर चौक (गोबर या आटे से) बनाएँ और उस पर एक साफ पटरा/चौकी रखें।
भाई को बिठाना:
भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पटरे/चौकी पर बिठाएँ।
भाई के सिर पर रुमाल या कोई कपड़ा रखें।
पूजा और तिलक:
सबसे पहले भगवान गणेश और यम देव की पूजा करें।
बहन पूजा की थाली लेकर पहले भाई की आरती उतारें।
भाई के हाथ की कलाई पर कलावा (रक्षा सूत्र) बाँधें।
रोली और अक्षत से भाई के माथे पर तिलक (टीका) करें।
भाई को मिठाई खिलाएँ।
भाई को नारियल भेंट करें।
प्रार्थना और आशीर्वाद:
बहनें हाथ जोड़कर यमराज से भाई की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
तिलक होने के बाद, भाई अपनी बहन को उपहार, वस्त्र या दक्षिणा देते हैं और उनके चरण छूकर आशीर्वाद लेते हैं।
इसके बाद, भाई-बहन एक साथ भोजन करते हैं।
विशेष :
मान्यता है कि इस दिन भाई को बहन के घर जाकर भोजन करना और तिलक करवाना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। ब्रजमंडल में इस दिन भाई-बहन का यमुना नदी में स्नान करना भी बहुत कल्याणकारी माना जाता है।
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