आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश प्रबंध तंत्र कमेटी विवाद
हाईकोर्ट से बहाल हुए देवेंद्र पाल आर्य व पंकज जायसवाल
~ भूपेंद्र निरंकारी
लखनऊ/बिजनौर। आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश, लखनऊ के प्रबंध तंत्र विवाद में माननीय उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सोसाइटी रजिस्ट्रार के आदेश को निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की आर्य समाज इकाइयों में हर्ष की लहर दौड़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
विदित हो कि सोसाइटी रजिस्ट्रार लखनऊ मंडल ने गत 5 दिसंबर 2025 को एक आदेश पारित कर आचार्य सुदेश को प्रधान और भुवन तिवारी को मंत्री घोषित किया था। इस आदेश को वर्तमान प्रधान देवेंद्र पाल आर्य एवं मंत्री पंकज जायसवाल ने माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी (याचिका संख्या 12312/2025)।

हाईकोर्ट का निर्णय
माननीय उच्च न्यायालय ने इस मामले में 17, 18 एवं 19 दिसंबर को लगातार तीन दिनों तक गहन बहस सुनने के उपरांत रजिस्ट्रार के आदेश को नियम विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया। न्यायालय ने पूर्व में कार्यरत देवेंद्र पाल आर्य (प्रधान) एवं पंकज जायसवाल (मंत्री) की कमेटी को ही आधिकारिक कार्य जारी रखने हेतु अधिकृत कर दिया है। साथ ही, न्यायालय ने रजिस्ट्रार लखनऊ को निर्देशित किया है कि संस्था के विवादों का निस्तारण समय रहते सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से कराया जाए।

बिजनौर में जोरदार स्वागत
न्यायालय के इस निर्णय के बाद आज रविवार, 21 दिसंबर को बिजनौर में साप्ताहिक यज्ञ के उपरांत एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। लखनऊ से लौटे सभा के उपमंत्री मनजीत सिंह और बिजनौर के प्रशासक रविंद्र पाल आर्य मुनी का आर्य समाज के सदस्यों ने फूल-मालाएं पहनाकर जोरदार स्वागत किया। मनजीत सिंह ने न्यायालय के आदेश की प्रति पढ़कर सुनाई और बताया कि प्रधान देवेंद्र पाल आर्य, मंत्री पंकज जायसवाल एवं कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार आर्य ने लखनऊ स्थित कार्यालय पहुंचकर अपना कार्यभार पुनः ग्रहण कर लिया है। स्वागत करने वालों में मुख्य रूप से प्रधान डॉ. सत्येंद्र शर्मा ‘अंगिरस’, मंत्री हर्ष कुमार, कोषाध्यक्ष अनुपम शर्मा, प्रबंधक विजेंद्र पाल सिंह आर्य, गौरव शर्मा, हितेश शर्मा, सत्येंद्र सिंह (बुडगरा वाले) सहित बड़ी संख्या में आर्यजन उपस्थित रहे।
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