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षट्तिला एकादशी के कारण तिथि में हुआ बदलाव

ज्योतिषीय संयोग: 14 नहीं, 15 जनवरी को मनेगी ‘मकर संक्रांति’

~शैली सक्सेना

लखनऊ | इस वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर बना संशय पंचांगों और ज्योतिषियों की गणना के बाद स्पष्ट हो गया है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात को हो रहा है, जिसके कारण पुण्यकाल 15 जनवरी को प्राप्त होगा। साथ ही, 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी होने के कारण भी मकर संक्रांति का पर्व और खिचड़ी दान 15 जनवरी को करना ही शास्त्र सम्मत माना गया है।

सूर्य का गोचर और पुण्यकाल का गणित

लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिर्विज्ञान विभाग के डॉ. बिपिन पांडेय के अनुसार, सूर्य 14 जनवरी की रात 9:38 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य के राशि प्रवेश के बाद के 16 घंटे पुण्यकाल कहलाते हैं।
15 जनवरी का मुहूर्त: 15 तारीख को सुबह सूर्योदय (06:57 बजे) के समय एकादशी समाप्त हो चुकी होगी और संक्रांति का पुण्यकाल प्रभावी रहेगा। इसलिए स्नान-दान के लिए 15 जनवरी का दिन सर्वश्रेष्ठ है।

एकादशी का संयोग और चावल निषेध

इस बार संक्रांति के साथ षट्तिला एकादशी का विशेष संयोग बन रहा है।
~ आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी और ज्योतिषाचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि 14 जनवरी को सूर्योदय से पूर्व ही एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो सूर्यास्त के बाद तक रहेगी।
~ धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का सेवन और दान दोनों ही वर्जित (निषिद्ध) होते हैं। चूंकि मकर संक्रांति का मुख्य पर्व ‘खिचड़ी’ (चावल और दाल का मिश्रण) से जुड़ा है, इसलिए एकादशी के दिन इसे मनाना दोषपूर्ण हो सकता है। इसी कारण 15 जनवरी को खिचड़ी का पर्व मनाना श्रेष्ठ है।

विभिन्न विद्वानों और पंचांगों ने समय की गणना कुछ इस प्रकार की है:

15 जनवरी खिचड़ी दान और दोष मुक्ति

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य पवन दीक्षित ने स्पष्ट किया कि 14 जनवरी को एकादशी होने के कारण जो लोग दान को लेकर संशय में थे, वे अब निश्चिंत होकर 15 तारीख को दान कर सकते हैं। 15 जनवरी को एकादशी का प्रभाव समाप्त हो जाएगा, अतः खिचड़ी के दान और सेवन से कोई दोष नहीं लगेगा।

दो दिन का भ्रम और समाधान

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, पंचांगों के समयभेद के कारण कुछ स्थानों पर भ्रम की स्थिति बनी है। हालांकि, अधिकांश गणनाओं में सूर्य का प्रवेश 14 की रात्रि को ही हो रहा है। चूंकि सूर्य अस्त होने के बाद संक्रांति होती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन के सूर्योदय से जोड़ा जाता है। अतः 15 जनवरी, गुरुवार को ही पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
> मुख्य बिंदु: 15 जनवरी को सुबह 06:04 बजे से दोपहर 01:19 बजे तक खिचड़ी पर्व और दान का विशेष महत्व रहेगा।

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पाठकों की सुविधा के लिए स्नान, दान और विशेष अनुष्ठानों की विस्तृत समय सारणी :

🔱 दान के लिए विशेष सामग्री (राशि अनुसार और सामान्य)

मकर संक्रांति पर इन वस्तुओं का दान सुख-समृद्धि लाता है:
* तिल और गुड़: सूर्य और शनि की प्रसन्नता के लिए।
* खिचड़ी (चावल-दाल): 14 को एकादशी के कारण, 15 जनवरी को इसका दान अत्यंत फलदायी होगा।
* ऊनी वस्त्र एवं कंबल: ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को वस्त्र दान का विशेष महत्व है।
* घी और रेवड़ी: शारीरिक स्वास्थ्य और घर में लक्ष्मी के वास के लिए।

⚠️ विशेष : “चूंकि इस बार 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी है, इसलिए जो श्रद्धालु उपवास रख रहे हैं, वे 15 जनवरी को सूर्योदय के पश्चात एकादशी का पारण कर मकर संक्रांति का उत्सव मनाएं। इससे एकादशी और संक्रांति दोनों के पुण्य का लाभ मिलेगा।” — आचार्य परिषद, लखनऊ।

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