‘क्रूर’ कार्रवाई के पीछे की चौंकाने वाली कानूनी कहानी
UNI का अंत: एक ऐतिहासिक संस्थान की ‘प्रशासनिक विफलता’ या सत्ता का प्रहार?
नई दिल्ली/लखनऊ: 20 मार्च 2026 की वह सुबह भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई। जब दिल्ली के रफी मार्ग स्थित यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) के मुख्यालय में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बल दाखिल हुए, तो नजारा किसी अपराधी के ठिकाने पर छापेमारी जैसा था। पत्रकारों को घसीटा गया, महिला कर्मियों के साथ बदसलूकी हुई और किसी को अपना निजी सामान तक उठाने का मौका नहीं दिया गया। …लेकिन, इस ‘क्रूर’ कार्रवाई के पीछे की जो कानूनी कहानी है, वह और भी चौंकाने वाली है। newsdaily24 इस विशेष विश्लेषण में उठा रहा है वो सवाल, जिनसे अक्सर मुख्यधारा का मीडिया बचता है।
टीन शेड में सिमटी पत्रकारिता: 40 साल की लापरवाही
सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि 1982 में UNI को यह बेशकीमती जमीन इस शर्त पर दी गई थी कि यहाँ एक आधुनिक ‘कम्युनिकेशन हब’ खड़ा किया जाएगा। विडंबना देखिए कि चार दशक बीत जाने के बाद भी वहां केवल पुराने दफ्तर और टीन के शेड ही मौजूद थे। संस्था की वित्तीय हालत इतनी जर्जर हो चुकी थी कि वह अपनी खुद की पक्की छत भी खड़ी नहीं कर सकी। कानूनी तौर पर सरकार (L&DO) ने इसी ‘उल्लंघन’ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। जब मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा, तो कोर्ट ने भी यही माना कि जिस उद्देश्य के लिए जमीन दी गई थी, वह पूरा नहीं हुआ।

प्रशासनिक विफलता ने थमाया ‘फ्री हैंड’
एक संपादक के रूप में हमें यह स्वीकार करना होगा कि UNI की आंतरिक प्रशासनिक विफलता ने ही सरकार को यह ‘फ्री हैंड’ दिया। जब संस्थान अपने कागजी और कानूनी मोर्चों पर कमजोर पड़ते हैं, तो सत्ता को उन्हें उखाड़ने का सुनहरा मौका मिल जाता है। क्या दशकों से चल रहे इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई गंभीर प्रयास हुए? या फिर वित्तीय संकट के नाम पर नियमों की अनदेखी को ही नियति मान लिया गया?
लोकतंत्र की हार या नियमों की जीत?
भले ही सरकार के पास ‘लीज कैंसिलेशन’ का कानूनी आधार हो, लेकिन जिस तरह से एक ऐतिहासिक न्यूज़ एजेंसी के साथ व्यवहार किया गया, वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। पत्रकारों को उनके काम के बीच से उठाकर सड़क पर फेंक देना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
यह घटना देश के अन्य पुराने मीडिया संस्थानों के लिए भी एक चेतावनी है। क्या हम तकनीकी और प्रशासनिक रूप से इतने मजबूत हैं कि नियमों के जाल में फंसकर अपना वजूद न खो दें?
UNI का सील होना सिर्फ एक इमारत का जाना नहीं है, बल्कि एक गौरवशाली इतिहास का मलबे में तब्दील होना है। प्रशासनिक लापरवाहियों ने सरकार को वह दरवाजा खोल कर दे दिया, जिससे घुसकर आज स्वतंत्र आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। — संजय सक्सेना संपादक, newsdaily24
20 मार्च 2026 को दिल्ली में United News of India (UNI) के मुख्यालय को सील किए जाने से 500 से अधिक कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है, जिसके दौरान लगभग 50 पत्रकारों को जबरन बाहर निकाला गया। वित्तीय संकट और NCLT में दिवालियापन की कार्यवाही के बीच हुई इस कार्रवाई ने कर्मचारियों के वेतन और नौकरी की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है, जिसका देश भर के पत्रकार संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। इस घटना का वीडियो विश्लेषण Instagram पर उपलब्ध है।
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