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यूपी पंचायत चुनाव 2021: आरक्षण लिस्‍ट में देर होने से बढ़ी प्रत्‍याशियों की धड़कनें, अभी करना होगा और इंतजार, गांव के दबंगों को पुलिस करेगी पाबंद

“ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों के लिए आने वाली आरक्षण सूची का किया जा रहा है इंतजार, जिसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि कौन से वार्ड और ग्राम सभा में किस जाति के लिए चुनाव लड़ने को सीट की गयी हैं अरक्षित”

लखनऊ। यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं। एक तरफ जहां प्रत्याशियों ने अपनी कमर कस ली है, वहीं पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से तैयार है। अब गांव में ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों के लिए आने वाली आरक्षण सूची का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि कौन से वार्ड और ग्राम सभा में किस जाति के लिए चुनाव लड़ने को सीट अरक्षित की गयी है। इस लिस्ट के लिए 22 जनवरी की तारीख सुनिश्चित की गयी थी जो कि बीत चुकी है, लेकिन अभी तक आरक्षण लिस्ट के बारे में कोई भी सूचना जारी नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव के आरक्षण को लेकर अभी तक सरकार में बैठकें चल रही हैं। ग्राम विकास राज्य मंत्री आनंद स्वरुप शुक्ला के मुताबिक 15 फ़रवरी तक स्थिति साफ हो सकती है। ऐसे में माना यही जा रहा है कि पंचायत चुनाव में अभी और देरी हो सकती है।

दबंगों का नए सिरे से चिन्हीकरण- पुलिस, शस्त्र लाइसेंस के सत्यापन के कार्य में जुटी हुई है। इसके साथ ही नए सिरे से गांव के दबंगों को भी चिन्हित किया जा रहा है। आमतौर पर यह शिकायत आती रहती थी कि चुनाव के दौर में पुलिस उन लोगों को भी पाबंद कर देती है, जिनका नाम लिस्ट में गलत दर्ज हो गया है। इसी शिकायत के चलते पुलिस ने ये जरुरी कदम उठाया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पंचायत चुनाव की वजह से ग्रामीण क्षेत्र काफी संवेदनशील हैं। ऐसे में गांव में तनाव की शिकायतें भी बढ़ने लगती हैं। लोगों को भड़का कर आपसी संघर्ष की घटना भी घटित हो जाती है। इसको लेकर अब सभी थानों को नए सिरे से गांव के दबंगों को चिन्हित करने और सत्यापन करने के आदेश दिए गए हैं। पुलिस उन लोगों की लिस्ट तैयार कर रही है, जिनका नाम पूर्व में किसी विवाद में आया हो या उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई हो। ऐसे लोगों की गांववार लिस्ट बनाकर समय से पाबंद किया जाएगा। अनुमानित तौर पर यह काम दस दिनों के अंदर हो जाएगा।

आरक्षण शून्य करने से बदली स्थिति: वर्ष 2015 में ग्राम पंचायतों में आरक्षण शून्य करने से स्थिति बदली हुई है। आरक्षण शून्य करने का अर्थ ग्राम पंचायतों में नए सिरे से आरक्षण लागू किया जाएगा। वर्ष 2000 में हुए आरक्षण का चक्र आगे नहीं बढ़ेगा। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़े वर्ग की जनसंख्या के आधार पर ग्राम पंचायतों की सूची वर्णमाला क्रम में बनाकर जातीय व जेंडर आरक्षण को लागू किया गया था। इसके विपरीत क्षेत्र व जिला पंचायतों में चक्रानुक्रम लागू हुआ था।

पांच वर्ष में 337 नई ग्राम पंचायतें सृजित : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने बाद प्रदेश में 337 नई ग्राम पंचायतें सृजित हुईं, जबकि 1217 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व शहरों में समाहित हो गया। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अनुसार प्रदेश की 75 जिला पंचायतों में वार्डों की संख्या वर्ष 2015 के 3,120 से घटकर 3,051 रह गई है। क्षेत्र पंचायतों की संख्या 821 से बढ़कर 826 हो गई है। दूसरी ओर क्षेत्र पंचायत वार्डों की संख्या 77,801 से घट कर 75,855 रह गई है। वर्ष 2015 में 59,074 ग्राम पंचायतों में प्रधान चुने गए थे, जबकि वर्ष 2021 में 58194 प्रधान चुने जाएंगे। इसी क्रम में ग्राम पंचायताों के वार्डों में भी कमी आई है। वर्ष 2015 में 7,44,558 वार्ड थे तो अब घटकर 7,31,813 ही रह गए हैं।

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