
जहां बदला ग्राम पंचायतों का स्वरूप, वहां वॉर्ड के मुताबिक होगा रैपिड सर्वे
लखनऊ। यूपी में शहरीकरण की वजह से बदले ग्राम पंचायतों के स्वरूप को देखते हुए रैपिड सर्वे की फिर से तैयारी है। यह रैपिड सर्वे वर्ष 2015 में करवाए गए रैपिड सर्वे में वॉर्डों के स्तर पर तैयार आंकड़ों के मुताबिक होगा।
यह बदला हुआ फॉर्म्युला इसलिए तैयार किया गया, क्योंकि हाल फिलहाल तेजी से बनीं नगर पंचायतों और शहरी निकायों के सीमा विस्तार की वजह से ग्राम पंचायतों के पुराने स्वरूप में बदलाव हुआ है।
कैसे तय किए जाएंगे ओबीसी आरक्षण-
पंचायतीराज विभाग ने हाल ही में पंचायत चुनाव में आरक्षण की अधिसूचना जारी की है। इसके बाद से ही सवाल उठ रहे हैं कि जब तमाम ग्राम पंचायतों का स्वरूप शहरीकरण की वजह से बदल गया है तो ओबीसी आरक्षण कैसे तय किए जाएंगे।
पहले विभाग की तरफ से दावेदारी पेश की जा रही थी कि वर्ष 2015 के रैपिड सर्वे के आधार पर पंचायतों में ओबीसी आरक्षण लागू होगा, लेकिन अब जबकि इसको लेकर तमाम आपत्तियां अभी से आनी शुरू हो गई हैं तो विभाग अब रैपिड सर्वे के लिए नई तरकीब पर काम कर रहा है।
‘जहां कहीं भी ग्राम पंचायतों के स्वरूप में काफी बदलाव आया है, वहां पर वर्ष 2015 में हुए रैपिड सर्वे में वॉर्ड के रैपिड सर्वे के मुताबिक नया आंकड़ा तैयार किया जाएगा। आधा-अधूरा वॉर्ड कहीं भी शहरी निकाय का हिस्सा नहीं हुआ है।’
मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, पंचायतीराज विभाग
जिलों को आदेश जल्द ही होंगे जारी-
यह बदली हुई तरकीब है वॉर्डों के डेटा के मुताबिक रैपिड सर्वे कराना। यह फॉर्म्युला उसी जगह पर इस्तेमाल किया जाएगा, जहां पर ग्राम पंचायतों के स्वरूप में काफी बदलाव आया है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही जिलों को इस तरह का रैपिड सर्वे करवाने के आदेश जारी कर दिए जाएंगे, जिसके आधार पर पंचायतों का आरक्षण तय किया जाएगा।
कहीं भी नहीं कटे हैं वॉर्ड-
विभाग का दावा है कि पूरे या आधे राजस्व ग्राम शहरी निकायों का हिस्सा हो गए हैं। ऐसी जगहों पर भी वॉर्ड को लेकर कोई बदलाव नहीं हुआ है। यानी, वॉर्ड या तो पूरी तरह शहरी निकाय में शामिल हो गए हैं या फिर पूरी तरह ग्रामीण निकाय का हिस्सा हैं। इसलिए वर्ष 2015 में करवाए गए रैपिड सर्वे में ग्रामीण निकायों के वॉर्ड के रैपिड सर्वे के आंकड़े को देखते हुए पूरी ग्राम पंचायत का रैपिड सर्वे करवाया जाएगा।
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