एक मार्च से देश में आनेवाले हैं 4 बदलाव
दिल्ली। एक मार्च 2021 से भारत में चार बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इन बदलावों का आपकी जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। इनसे एक ओर जहां आपको राहत मिलेगी, वहीं अगर आपने कुछ बातों का ध्यान नहीं रखा तो आपको आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।
बुजुर्गों को लगेगा कोरोना का टीका – भारत समेट दुनियाभर के देशों में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चल रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण करीब एक साल तक देश ही नहीं विश्व की चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन देश में 60 या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए खुशखबरी है। बुजुर्गों को सरकार मार्च महीने से कोरोना का टीका लगाना शुरू कराने जा रही है। 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को कोविड का टीका लगने लगेगा।
उठा सकते हैं प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना का लाभ – भारत सरकार ने विवाद से विश्वास योजना की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना के तहत कर संबंधी घोषणा दाखिल करने की समय सीमा 31 मार्च तक के लिए बढ़ा दी है। इसके साथ ही भुगतान के लिए समय 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है। पहले इस योजना के तहत घोषणा करने की समय सीमा 28 फरवरी थी। यानी अब करदाता मार्च में भी इस सरकारी योजना का लाभ उठा सकते हैं।
बैंक ग्राहकों का बदलेगा IFSC कोड – अगर आपका खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में है तो ये खबर आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। एक अप्रैल 2019 से विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ विलय प्रभावी हो गया था। इसके बाद देना बैंक और विजया बैंक के ग्राहक बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहक बन गए। अब बैंक ने आगाह किया है कि एक मार्च 2021 से विजया बैंक और देना बैंक के आईएफएससी कोट काम नहीं करेंगे। ग्राहकों को एक मार्च से ग्राहकों को नए आईएफएससी कोड का इस्तेमाल करना होगा। ग्राहक नए कोड से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए बैंक की वेबसाइट पर जा सकते हैं।
खुलेंगे पांचवीं कक्षा तक के विद्यालय – एक मार्च से उत्तर प्रदेश और बिहार में पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थी ऑफलाइन पढ़ाई के लिए विद्यालय आ सकेंगे। ऑफलाइन कक्षाएं शुरू कराने की तैयारी शिक्षा विभाग ने पूरी कर ली है। स्कूलों में साफ-सफाई कराने के साथ ही सैनिटाइज कराने का काम किया जा रहा है। सतर्कता और सावधानी के साथ प्राथमिक स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं लगाई जाएंगी। स्कूलों में आने के लिए अभिभावकों का सहमति पत्र शिक्षा विभाग की ओर से अनिवार्य किया गया है। इसके बिना छात्रों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिलेगा।
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