लखनऊ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मतदाताओं को लुभाना, भरमाना प्रत्याशियों को भारी पड़ सकता है। किसी भी तरह से मनमाना खर्च पर रोक लगाते हुए राज्य चुनाव आयोग ने गाइडलाइन जारी कर दी है। आयोग ने चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के खर्च की निगरानी के लिए जिलाधिकारियों (जिला चुनाव अधिकारियों) को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने से पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला मजिस्ट्रेटों से कहा है कि उम्मीदवारों के खर्च के बारे में चुनाव खर्च की निगरानी के लिए उनकी अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति का गठन करें।

जिला समिति क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव खर्च की निगरानी करेगी। प्रधान पद के लिए तहसील स्तर पर उप जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक समिति होगी। चुनाव की घोषणा तक नामांकन दाखिल करने की तिथि से, उम्मीदवारों को निर्धारित प्रारूप के खाता रजिस्टर में दैनिक चुनाव खर्च का विवरण लिखना होगा। ग्राम पंचायत सदस्य के अलावा अन्य पदों के उम्मीदवारों को भी चुनाव खर्च के लिए एक अलग बैंक खाता खोलना होगा। चुनाव समाप्त होने के तीन महीने के भीतर, उम्मीदवारों को वाउचर के साथ खाता रजिस्टर समिति को प्रस्तुत करना होगा। यदि जांच में व्यय को अधिकतम व्यय सीमा से अधिक पाया जाता है, तो संबंधित उम्मीदवार की जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।
10 हजार से चार लाख तक की सीमा-राज्य निर्वाचन आयोग ने विभिन्न पदों के लिए चुनाव खर्च की सीमा को वर्ष 2015 के चुनावों के समान ही रखा है। ग्राम पंचायत सदस्य के लिए 10 हजार, प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) के लिए 75 हजार, जिला पंचायत सदस्य के लिए 1.50 लाख, ब्लॉक प्रमुख के लिए दो लाख, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए चार लाख रुपए तक ही खर्च किए जा सकेंगें। इस बार ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए नामांकन की राशि 150 रुपए होगी, जबकि प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 300, जिला पंचायत सदस्य के लिए 500, ब्लॉक प्रमुख के लिए 800 और जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए 1500 रुपए रखा गया है। आरक्षित वर्ग के लिए नामांकन राशि आधी होगी।
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