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किसी मतदाता की उंगली पर एक बार स्याही लग गई तो उसे वोट डालने से नहीं रोका जा सकता। आपत्ति पर कोई विचार नहीं करेगा पीठासीन अधिकारी। संशय है तो अभिकर्ता को स्याही लगाने से पहले ही दर्ज करानी होगी आपत्ति।

लखनऊ। पंचायत चुनाव में मतदान के दौरान एक बार स्याही लगाने के बाद मतदाता को उसके मताधिकार के प्रयोग से वंचित नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही अभिकर्ताओं की आपत्ति भी पहले ही सुनी जाएगी। स्याही लगाने की आपत्ति पर पीठासीन अधिकारी कोई विचार नहीं करेगा। उत्तर प्रदेश में 19 अप्रैल को होने वाले पंचायत चुनाव के मतदान के लिए निर्वाचन आयोग ने नियमों की पूरी निर्देश पुस्तिका जारी की है। इसमें कई अहम निर्णयों के संबंघ में निर्देशित किया गया है। इसमें से ही एक खास निर्देश मतदाता को लेकर की गई आपत्ति के संबंध में है। इसके तहत अगर एक बार मतदान केंद्र पर पहुंचे मतदाता के बाएं हाथ की अंगुली पर स्याही का निशान लगा दिया गया है तो उसकी पहचान पर दर्ज कराई गई आपत्ति मान्य नहीं होगी। अभिकर्ता की आपत्ति को नजरअंदाज कर हर हाल में मतदान पार्टी उसे मतपत्र देगी। इससे वह अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा। अगर किसी भी मतदाता की पहचान में कोई संशय है तो अभिकर्ता को स्याही लगाने से पहले ही आपत्ति दर्ज करानी होगी। आपत्ति दर्ज होने के बाद पीठासीन ऐसे मतदाता को अपने पास निर्णय के लिए ले लेगा। वहीं आगे मतदान जारी रहने दिया जाएगा।  

फर्जी पड़ा है वोट तो भी देना होगा दूसरा मतपत्र- 

अगर कोई मतदाता बूथ पर मतदान के लिए पहुंचता है और उसका वोट पहले ही डाला जा चुका है तो भी उसे मतपत्र उपलब्ध कराना होगा। इससे पूर्व पीठासीन अधिकारी संबंधित मतदाता की अंगुली पर स्याही का निशान चेक करने के साथ ही उससे पहचान के संबंध में सवाल-जवाब कर सकता है, लेकिन हर हाल में उसे मतपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि इन मतपत्रों को पेटी में न डालकर अलग लिफाफे में रखा जाएगा। सीडीओ/उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सभी पीठासीन अधिकारियों को प्रशिक्षण में चुनाव आयोग के निर्देशों के बारे में बताया जा चुका है। साथ ही उन्हें निर्देश पुस्तिका भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अनुसार ही वे मतदान के दौरान निर्णय लें।

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