बुरा मानो या भला। कोविड-19 काल में सरकार इन मुफ्तखोरों पर भी ध्यान करे: मनोज शास्त्री
इधर देश में कोविड-19 शुरू हुआ और उधर मुफ्तखोरों और उनके आकाओं ने चिल्लपों मचानी शुरू कर दी कि लॉकडाउन में सरकार बिजली, पानी, गेहूं राशन इत्यादि मुफ़्त दे। दरअसल ग़लती इन मुफ्तखोरों की नहीं है, गलती है उन “अयोग्य राजनीतिक नेताओं” की है, जिन्होंने चुनाव जीतकर “मुफ़्त राशन-कपड़ा बांटो” अभियान चलाकर कुछ लोगों को हरामखोरी की आदत डाल दी। किसी ने मुफ़्त में लैपटॉप बांटे, किसी ने बिजली-पानी मुफ़्त दिया, किसी ने बसों में यात्रा मुफ़्त कर दी तो कोई सब्सिडी के नाम पर सरकारी खज़ाना लुटा रहा है। जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को अपने राजनीतिक फायदे के लिए बांटने की एक नई परम्परा की शुरुआत हो चुकी है और मुफ्तखोरों को अब उसकी लत लग गई है। मुफ़्त में शराब और कबाब पाने वाले अब मुफ़्त का बिजली, पानी, कम्प्यूटर, लैपटॉप आदि पाने की इच्छा करने लगे हैं। हद तो यह है कि अपने घर के शौचालय में जाने के लिए भी बाइक का इस्तेमाल करने वाले भी मुफ़्त का पेट्रोल चाहते हैं। इन मुफ्तखोरों से कोई पूछे कि इनके बाप-दादाओं ने भी कभी इन्कम टैक्स/सेल्स टैक्स या कोई सा भी टैक्स सरकार को कभी दिया है? कभी सरकार को अपनी कमाई का हिसाब-किताब देना तो दूर की बात है, इनमें से बहुतों के पास तो वैध दस्तावेज़ भी नहीं होंगे। अगर CAA और NRC लागू करा दिया जाए तो इनमें से 90 प्रतिशत लोग घुसपैठियों की सूची में शामिल होंगे और इनके आका सड़कों पर ढपलियाँ बजाते नज़र आएंगे। इन मुफ्तखोरों को न कोई धर्म है, न ईमान। हरामखोरी और मुफ़्तख़ोरी इनका मुख्य व्यवसाय है। अपने आकाओं के ईशारों पर सोशल मीडिया पर सरकार का विरोध और हमेशा मुफ़्तख़ोरी की पैरवी करना ही इनका एकमात्र धर्म है।
इस देश में बहुत लोग ऐसे हैं जो वास्तव में जरूरतमंद हैं, ग़रीब हैं, सही शब्दों में कहा जाए तो जो लोग वाकई में सरकारी मदद के मुस्तहिक़ हैं, उन बेचारों को तो 1kg गेहूं भी बमुश्किल मिल पाता है, जबकि अवैध घुसपैठ करने वाले कथित शरणार्थी और मुफ़्तख़ोर अपने आकाओं के दम पर सरकारी मदद की सबसे ज़्यादा मौज उड़ा रहे हैं। यह सही है कि कोविड-19 की इस आपदा की घड़ी में सरकार को बिजली के बिल/पानी के बिल माफ़ करने चाहिए और सम्भव हो तो कोरोना मरीजों को मुफ़्त में ईलाज भी मिले। लेकिन यह सब उन लोगों के लिए हो, जो इस सबके वाकई मुस्तहिक़ हैं या जो लोग समय पर आयकर/बिक्रीकर भरते हैं और जिनपर वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं।
🖋️ *मनोज चतुर्वेदी “शास्त्री”* समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-पत्र (नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)
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